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नगरपालिकाएँ, संघ राज्यक्षेत्र और विशेष उपबंध

राज्य और स्थानीय शासन · भाग 3 / 3 · तथ्य-जाँच की तिथि · हम कैसे जाँचते हैं

स्रोतों (नीचे सूचीबद्ध) से AI की मदद से लिखा गया, फिर एक अलग AI से तथ्य-जाँच की गई।

74वाँ संशोधन और भाग 9क (नगरपालिका के प्रकार, वार्ड और वार्ड समितियाँ, बारहवीं अनुसूची, जिला और महानगर योजना समितियाँ), राजेंद्र एन. शाह (2021) के बाद सहकारी सोसाइटियाँ और भाग 9ख, अनुच्छेद 239–241 के अधीन संघ राज्यक्षेत्र, अनुच्छेद 239कक के अधीन दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र के मामले, अनुच्छेद 371–371ञ के विशेष उपबंध, और अनुच्छेद 370।

भाग 2 में गाँव की चर्चा हुई। यह अंतिम भाग तीन ऐसी स्थितियों को देखता है जहाँ संविधान सामान्य राज्य-ढाँचे को ढालता है। पहले नगर और शहर आते हैं: 74वें संशोधन ने भाग 9क के माध्यम से प्रत्येक नगरपालिका को वही संवैधानिक आधार दिया जो 73वें ने पंचायतों को दिया था। फिर वे क्षेत्र आते हैं जिन्हें संघ स्वयं चलाता है, अर्थात् प्रत्येक संघ राज्यक्षेत्र, जिनमें दिल्ली अपने आप में अलग श्रेणी है। अंत में अनुच्छेद 371 से 371ञ में विशेष खंडों वाले राज्य आते हैं, और अनुच्छेद 370 की कहानी। साझा सूत्र: एक मूल ढाँचा, जिसे हर स्थान के अनुसार मोड़ा जाता है।

1992 से पहले कोई राज्य किसी निर्वाचित नगर निकाय को अधिक्रांत करके वर्षों तक किसी अधिकारी से चला सकता था और चुनाव अपनी इच्छा से कराता था। नगरपालिकाओं की रक्षा के लिए 1989 का एक विधेयक पंचायत विधेयक के साथ राज्य सभा में विफल रहा। 74वें संशोधन अधिनियम, 1992 ने भाग 9क (अनुच्छेद 243त से 243यछ) जोड़ा, जो 1 जून 1993 से प्रवृत्त है। अनुच्छेद 243थ तीन प्रकार की नगरपालिका का उपबंध करता है: ग्रामीण से नगरीय में संक्रमणशील क्षेत्र के लिए नगर पंचायत, छोटे नगरीय क्षेत्र के लिए नगरपालिका परिषद और बड़े नगरीय क्षेत्र के लिए नगर निगम। राज्यपाल लोक अधिसूचना द्वारा श्रेणी तय करता है, जिसमें जनसंख्या, घनत्व, राजस्व, गैर-कृषि रोजगार और आर्थिक महत्त्व देखे जाते हैं। जहाँ कोई औद्योगिक प्रतिष्ठान नगरीय सेवाएँ दे रहा है या देने का प्रस्ताव रखता है, वहाँ राज्यपाल उस क्षेत्र को औद्योगिक नगरी घोषित कर सकता है, और वहाँ नगरपालिका गठित करना आवश्यक नहीं है।

अनुच्छेद 243द के अधीन नगरपालिका का हर स्थान वार्डों से प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा भरा जाता है। राज्य विधि नगरपालिका प्रशासन का विशेष ज्ञान रखने वाले व्यक्तियों (मताधिकार के बिना), स्थानीय सांसदों और विधायकों, और वार्ड समितियों के अध्यक्षों को जोड़ सकती है। अनुच्छेद 243ध तीन लाख या अधिक जनसंख्या वाली प्रत्येक नगरपालिका में वार्ड समितियाँ अनिवार्य करता है। अनुच्छेद 243न अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए उनकी जनसंख्या के अनुपात में और महिलाओं के लिए, उन वर्गों की महिलाओं सहित, कम से कम एक-तिहाई स्थान आरक्षित करता है; अध्यक्षों के पदों और पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण राज्य विधि पर छोड़ा गया है। पदावधि पाँच वर्ष है (अनुच्छेद 243प); विघटन से पहले नगरपालिका को सुनवाई का अवसर देना होता है, और छह मास के भीतर उसकी उत्तराधिकारी चुनी जानी चाहिए।

अनुच्छेद 243ब राज्य विधि को यह अनुमति देता है कि वह नगरपालिकाओं को स्वायत्त शासन की संस्थाओं के रूप में आवश्यक शक्तियाँ दे, जिनमें आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय की योजना बनाना और बारहवीं अनुसूची के विषय शामिल हैं। उस अनुसूची में 18 विषय हैं, जिनमें नगरीय योजना, भूमि-उपयोग का विनियमन, सड़कें और पुल, जल-प्रदाय, लोक स्वास्थ्य और स्वच्छता, अग्निशमन सेवाएँ, गंदी बस्तियों का सुधार, नगरीय निर्धनता उन्मूलन, कब्रिस्तान और श्मशान, जन्म और मृत्यु का पंजीकरण, तथा सड़कों पर प्रकाश और पार्किंग शामिल हैं। राज्य नगरपालिकाओं को कर, पथकर और फीस लगाने और रखने की अनुमति दे सकता है और उन्हें अनुदान दे सकता है (अनुच्छेद 243भ)। पंचायतों के लिए गठित राज्य वित्त आयोग नगरपालिकाओं के वित्त का भी पुनर्विलोकन करता है (अनुच्छेद 243म), और राज्य निर्वाचन आयोग नगरपालिका निर्वाचन कराता है (अनुच्छेद 243यक)।

अनुच्छेद 243यघ प्रत्येक जिले में जिला योजना समिति अनिवार्य करता है, जो पंचायतों और नगरपालिकाओं की योजनाओं को समेकित करके पूरे जिले की विकास योजना का प्रारूप बनाए। इसके कम से कम चार-पंचमांश सदस्य जिला पंचायत और नगरपालिकाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा अपने में से, जिले की ग्रामीण और नगरीय जनसंख्या के अनुपात में, निर्वाचित होते हैं। अनुच्छेद 243यङ प्रत्येक महानगर क्षेत्र के लिए महानगर योजना समिति अनिवार्य करता है; अनुच्छेद 243त महानगर क्षेत्र को दस लाख या अधिक जनसंख्या वाला क्षेत्र बताता है; इसके कम से कम दो-तिहाई सदस्य क्षेत्र की नगरपालिकाओं के सदस्यों और पंचायतों के अध्यक्षों द्वारा निर्वाचित होते हैं। भाग 9 की तरह भाग 9क भी अनुसूचित क्षेत्रों और जनजाति क्षेत्रों पर स्वतः लागू नहीं होता (अनुच्छेद 243यग), और अनुच्छेद 243यछ नगरपालिका निर्वाचन के मामलों में, निर्वाचन अर्जी के सिवाय, न्यायालयों का हस्तक्षेप रोकता है।

पंचायतें और नगरपालिकाएँ: तुलना
विशेषतापंचायतेंनगरपालिकाएँ
संशोधन, प्रवर्तन73वाँ (1992), 24 अप्रैल 199374वाँ (1992), 1 जून 1993
भाग और अनुच्छेदभाग 9, 243–243णभाग 9क, 243त–243यछ
अनुसूचीग्यारहवीं, 29 विषयबारहवीं, 18 विषय
इकाइयाँतीन स्तर (20 लाख से कम पर मध्य स्तर वैकल्पिक)नगर पंचायत, नगरपालिका परिषद, नगर निगम
जमीनी निकायग्राम सभा (गाँव के सभी मतदाता)वार्ड समितियाँ (जनसंख्या 3 लाख या अधिक)
योजना निकायजिला योजना समिति (साझा)जिला योजना समिति; महानगर योजना समिति (10 लाख या अधिक)
समान विशेषताएँपाँच वर्ष की पदावधि, एक-तिहाई महिलाएँ, राज्य निर्वाचन आयोग, राज्य वित्त आयोगवही

97वें संशोधन अधिनियम, 2011 ने अनुच्छेद 19(1)(ग) की संगम की स्वतंत्रता में सहकारी सोसाइटियाँ जोड़ीं, अनुच्छेद 43ख में एक निदेशक तत्त्व रखा जो राज्यों से उनके स्वैच्छिक गठन, स्वायत्त कार्यकरण और व्यावसायिक प्रबंधन को बढ़ावा देने को कहता है, और भाग 9ख (अनुच्छेद 243यज से 243यन) जोड़ा। भाग 9ख किसी सोसाइटी के बोर्ड को अधिकतम 21 निदेशकों तक सीमित करता है, निर्वाचित बोर्ड सदस्यों को पाँच वर्ष की पदावधि देता है और बोर्ड में अनुसूचित जातियों या अनुसूचित जनजातियों तथा महिलाओं के लिए स्थान आरक्षित करता है। किंतु सहकारी सोसाइटियाँ राज्य सूची का विषय हैं। भारत संघ बनाम राजेंद्र एन. शाह (2021) में उच्चतम न्यायालय ने माना कि राज्य के विषय में इतनी गहराई तक जाने वाले संशोधन को अनुच्छेद 368(2) के अधीन आधे राज्य विधान-मंडलों का अनुसमर्थन चाहिए था, जो कभी नहीं मिला। भाग 9ख राज्य के भीतर की सहकारी सोसाइटियों के लिए निरस्त हुआ और केवल बहु-राज्य सहकारी सोसाइटियों के लिए बचा है।

संघ राज्यक्षेत्र का शासन संघ करता है क्योंकि वह अकेले खड़ा होने के लिए बहुत छोटा है, सामरिक स्थान पर है, सांस्कृतिक रूप से अलग है या राष्ट्रीय राजधानी है। भाग 8 (अनुच्छेद 239 से 241) के अधीन राष्ट्रपति प्रत्येक का प्रशासन एक प्रशासक के माध्यम से करता है, जिसे उपराज्यपाल या प्रशासक कहा जाता है। अनुच्छेद 239(2) किसी पड़ोसी राज्य के राज्यपाल को प्रशासक बनने देता है, जो इस भूमिका में अपने राज्य की मंत्रिपरिषद से स्वतंत्र होकर कार्य करता है। 26 जनवरी 2020 से, जब दादरा और नागर हवेली तथा दमण और दीव का विलय हुआ, आठ संघ राज्यक्षेत्र हैं: अंडमान और निकोबार द्वीप, चंडीगढ़, दादरा और नागर हवेली तथा दमण और दीव, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, लक्षद्वीप और पुडुचेरी। उनकी रक्षा के लिए कोई राज्य सूची नहीं है, इसलिए संसद उनके लिए किसी भी विषय पर विधि बना सकती है (अनुच्छेद 246(4))।

अनुच्छेद 239क (14वाँ संशोधन, 1962) संसद को पुडुचेरी के लिए विधान-मंडल और मंत्रिपरिषद बनाने देता है, जो उसने संघ राज्यक्षेत्र शासन अधिनियम, 1963 द्वारा किया; उसका प्रशासक विधान-मंडल के सत्र में न होने पर अध्यादेश जारी कर सकता है (अनुच्छेद 239ख)। जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 ने जम्मू-कश्मीर को विधान-मंडल दिया, लद्दाख को नहीं। अनुच्छेद 240 के अधीन राष्ट्रपति अंडमान और निकोबार द्वीप, लक्षद्वीप, तथा दादरा और नागर हवेली और दमण और दीव के लिए विनियम बनाता है, और ऐसा विनियम वहाँ लागू संसद के किसी अधिनियम को निरसित या संशोधित तक कर सकता है। अनुच्छेद 241 संसद को किसी संघ राज्यक्षेत्र को उसका अपना उच्च न्यायालय देने देता है: दिल्ली में 1966 से एक है, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का एक साझा है, और बाकी किसी पड़ोसी राज्य के उच्च न्यायालय से जुड़े हैं, जैसे पुडुचेरी मद्रास से और लक्षद्वीप केरल से।

दिल्ली एक विशेष स्थिति है। बालकृष्णन समिति के प्रतिवेदन के बाद आए 69वें संशोधन अधिनियम, 1991 ने अनुच्छेद 239कक और 239कख जोड़े और राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र दिल्ली बनाया। इसकी निर्वाचित विधान सभा राज्य सूची और समवर्ती सूची के विषयों पर विधि बना सकती है, सिवाय लोक व्यवस्था, पुलिस और भूमि के। मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद, जो विधान सभा के दस प्रतिशत से बड़ी नहीं होती, सामूहिक रूप से विधान सभा के प्रति उत्तरदायी है और उपराज्यपाल को सलाह देती है; उपराज्यपाल मतभेद को राष्ट्रपति को निर्दिष्ट करके उसके विनिश्चय के अनुसार कार्य कर सकता है। अनुच्छेद 239कख संवैधानिक तंत्र विफल होने पर राष्ट्रपति को ये व्यवस्थाएँ निलंबित करने देता है। उच्चतम न्यायालय ने 2018 में माना कि बाहर रखे गए विषयों के अलावा उपराज्यपाल सामान्यतः मंत्रिपरिषद की सलाह से बँधा है और मतभेद केवल असाधारण स्थिति में निर्दिष्ट करे, और 2023 में माना कि उन तीन विषयों को छोड़कर सेवाओं पर नियंत्रण निर्वाचित सरकार का है। इसके बाद संसद ने राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र दिल्ली शासन (संशोधन) अधिनियम, 2023 पारित किया, जिसने राष्ट्रीय राजधानी सिविल सेवा प्राधिकरण बनाया।

अनुच्छेद 371 से 371ञ विशेष राज्यों के लिए विशेष उपबंध जोड़ते हैं, प्रायः किसी पिछड़े क्षेत्र, जनजातीय प्रथाओं या किसी क्षेत्र के भारत में मिलते समय तय शर्तों की रक्षा के लिए। अनुच्छेद 371 के अधीन महाराष्ट्र या गुजरात के राज्यपाल को विदर्भ और मराठवाड़ा, या सौराष्ट्र और कच्छ जैसे क्षेत्रों के लिए अलग विकास बोर्डों का विशेष उत्तरदायित्व दिया जा सकता है। अनुच्छेद 371क (13वाँ संशोधन, 1962) के अधीन नागाओं की धार्मिक या सामाजिक प्रथाओं, नागा रूढ़िजन्य विधि और प्रक्रिया, उस विधि के अनुसार विनिश्चित सिविल और दांडिक न्याय, या भूमि और उसके संसाधनों के स्वामित्व और अंतरण पर संसद का कोई अधिनियम नागालैंड पर तब तक लागू नहीं होता जब तक उसकी विधान सभा संकल्प द्वारा ऐसा तय न करे; अनुच्छेद 371छ मिज़ोरम को ऐसी ही सुरक्षा देता है। शेष खंड, असम से कर्नाटक तक, तालिका में दिए गए हैं।

राज्यों के लिए विशेष उपबंध (अनुच्छेद 371–371ञ)
अनुच्छेदराज्यमुख्य विशेषता
371महाराष्ट्र, गुजरातक्षेत्रीय विकास बोर्डों के लिए राज्यपाल का विशेष उत्तरदायित्व
371क (13वाँ संशोधन, 1962)नागालैंडनागा प्रथाओं, रूढ़िजन्य विधि और भूमि पर संसद के अधिनियम तभी लागू जब विधान सभा संकल्प करे
371ख (22वाँ संशोधन, 1969)असमजनजाति क्षेत्रों के सदस्यों की विधान सभा समिति
371ग (27वाँ संशोधन, 1971)मणिपुरपहाड़ी क्षेत्रों के सदस्यों की विधान सभा समिति
371घ, 371ङ (32वाँ संशोधन, 1973)आंध्र प्रदेश (371घ तेलंगाना पर भी)लोक नियोजन और शिक्षा में समान अवसर; एक केंद्रीय विश्वविद्यालय (371ङ)
371च (36वाँ संशोधन, 1975)सिक्किमसिक्किम के राज्य बनने की विशेष शर्तें
371छ (53वाँ संशोधन, 1986)मिज़ोरमनागालैंड की तरह मिज़ो प्रथाओं, रूढ़िजन्य विधि और भूमि की सुरक्षा
371ज (55वाँ संशोधन, 1986)अरुणाचल प्रदेशविधि और व्यवस्था के लिए राज्यपाल का विशेष उत्तरदायित्व
371झ (56वाँ संशोधन, 1987)गोवाकम से कम 30 सदस्यों की विधान सभा
371ञ (98वाँ संशोधन, 2012)कर्नाटकहैदराबाद-कर्नाटक क्षेत्र के लिए विकास बोर्ड और स्थानीय आरक्षण

शीर्षक में अस्थायी उपबंध कहा गया अनुच्छेद 370 कभी जम्मू-कश्मीर को अलग रखता था: अधिकांश संघीय विधियाँ वहाँ केवल उसकी सरकार की सहमति से पहुँचती थीं, और उसका अपना संविधान था। 5 अगस्त 2019 के एक राष्ट्रपति आदेश ने भारत का पूरा संविधान वहाँ लागू किया, और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 ने 31 अक्टूबर 2019 से राज्य को दो संघ राज्यक्षेत्रों में बाँटा, विधान-मंडल सहित जम्मू-कश्मीर और बिना विधान-मंडल के लद्दाख। संविधान के अनुच्छेद 370 के संबंध में (11 दिसंबर 2023) में उच्चतम न्यायालय की पाँच न्यायाधीशों की पीठ ने आदेश को बरकरार रखा, यह मानते हुए कि अनुच्छेद 370 एक अस्थायी व्यवस्था थी और जम्मू-कश्मीर की संघ से अलग कोई संप्रभुता नहीं थी। उसने राज्य का दर्जा बहाल करने के संघ के आश्वासन को अभिलिखित किया और 30 सितंबर 2024 तक विधान सभा निर्वाचन कराने का निर्देश दिया। अनुच्छेद 370 एक राज्य के संघ से संबंध के बारे में था; अनुच्छेद 371 कई राज्यों के लिए सुरक्षाओं का एक परिवार है।

तीनों भागों को साथ रखें तो एक सीढ़ी दिखती है। सबसे ऊपर राज्यपाल, निर्वाचित सरकार और विधान-मंडल वाले राज्य हैं (भाग 1), जिनमें से कुछ में अनुच्छेद 371 के खंड हैं। उनके नीचे संघ राज्यक्षेत्र हैं, जिनमें दिल्ली, पुडुचेरी और जम्मू-कश्मीर के निर्वाचित विधान-मंडल सीमित शक्तियों वाले हैं। आधार पर पंचायतें (भाग 2) और प्रत्येक नगरपालिका हैं, सभी पाँच-वर्षीय प्रत्यक्ष निर्वाचन, आरक्षण, राज्य निर्वाचन आयोग और राज्य वित्त आयोग के एक ही ढाँचे पर, पर शक्तियों और धन के लिए राज्य विधि पर निर्भर। संघ राज्यक्षेत्र के पास राज्य सूची की ढाल नहीं है, इसलिए संसद वहाँ किसी भी विषय पर विधि बना सकती है; राज्य के पास यह ढाल है, और अनुच्छेद 371क और 371छ के अधीन नागालैंड और मिज़ोरम की विधान सभाएँ तय करती हैं कि संसद के कुछ अधिनियम लागू हों या नहीं।

परीक्षा में ध्यान दें

पुनरावृत्ति

अभ्यास प्रश्न

Q1. 74वें संशोधन द्वारा जोड़ी गई संविधान की बारहवीं अनुसूची में नगरपालिकाओं के लिए कितने विषय हैं?

  1. 11
  2. 18
  3. 29
  4. 47
उत्तर देखें

उत्तर: B. 18

बारहवीं अनुसूची में 18 विषय हैं। 29 पंचायतों की ग्यारहवीं अनुसूची की संख्या है; 11 और 47 स्थानीय शासन की किसी अनुसूची से मेल नहीं खाते।

Q2. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अनुच्छेद 243ध के अधीन तीन लाख या अधिक जनसंख्या वाली प्रत्येक नगरपालिका में वार्ड समितियाँ गठित होनी चाहिए।
2. अनुच्छेद 243त के अधीन महानगर क्षेत्र दस लाख या अधिक जनसंख्या वाला क्षेत्र है।
3. जिला योजना समिति के कम से कम दो-तिहाई सदस्य निर्वाचित होने चाहिए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 1 और 2
  3. केवल 2 और 3
  4. 1, 2 और 3
उत्तर देखें

उत्तर: B. केवल 1 और 2

कथन 1 और 2 सही हैं। कथन 3 गलत है: जिला योजना समिति में कम से कम चार-पंचमांश निर्वाचित सदस्य चाहिए; दो-तिहाई का नियम महानगर योजना समिति का है। 'केवल 1' कथन 2 को छोड़ देता है, और 3 वाले विकल्प गलत हैं।

Q3. निम्नलिखित में से कौन-सा अनुच्छेद 243थ में नामित नगरपालिका के तीन प्रकारों में से एक नहीं है?

  1. नगर पंचायत
  2. नगरपालिका परिषद
  3. नगर निगम
  4. छावनी बोर्ड
उत्तर देखें

उत्तर: D. छावनी बोर्ड

अनुच्छेद 243थ नगर पंचायत, नगरपालिका परिषद और नगर निगम का नाम लेता है। छावनी बोर्ड इनमें नहीं है, इसलिए वही उत्तर है; बाकी तीन विकल्प वे प्रकार हैं जिनका उपबंध अनुच्छेद करता है।

Q4. भारत संघ बनाम राजेंद्र एन. शाह (2021) में उच्चतम न्यायालय ने माना कि संविधान का भाग 9ख:

  1. पूर्णतः वैध है, क्योंकि सहकारी सोसाइटियाँ संघ का विषय हैं
  2. राज्य के भीतर की सहकारी सोसाइटियों के लिए अवैध है पर बहु-राज्य सहकारी सोसाइटियों के लिए बचा रहता है
  3. बहु-राज्य सहकारी सोसाइटियों सहित पूर्णतः अवैध है
  4. केवल नगरीय सहकारी बैंकों पर लागू होता है
उत्तर देखें

उत्तर: B. राज्य के भीतर की सहकारी सोसाइटियों के लिए अवैध है पर बहु-राज्य सहकारी सोसाइटियों के लिए बचा रहता है

न्यायालय ने राज्य के भीतर की सहकारी सोसाइटियों के लिए भाग 9ख को निरस्त किया, क्योंकि 97वें संशोधन ने आधे राज्यों के अनुसमर्थन के बिना राज्य सूची के विषय को छुआ, पर बहु-राज्य सोसाइटियों के लिए उसे बनाए रखा। सहकारी सोसाइटियाँ राज्य का विषय हैं, इसलिए पहला विकल्प गलत है; भाग पूर्णतः निरस्त नहीं हुआ; और मामला नगरीय सहकारी बैंकों तक सीमित नहीं था।

Q5. संघ राज्यक्षेत्रों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्रत्येक संघ राज्यक्षेत्र का प्रशासन राष्ट्रपति एक प्रशासक के माध्यम से करता है।
2. पड़ोसी संघ राज्यक्षेत्र का प्रशासक नियुक्त राज्यपाल उस भूमिका में अपने राज्य की मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 2
  3. 1 और 2 दोनों
  4. न तो 1, न ही 2
उत्तर देखें

उत्तर: A. केवल 1

कथन 1 अनुच्छेद 239(1) है। कथन 2 गलत है: अनुच्छेद 239(2) के अधीन ऐसा राज्यपाल अपनी मंत्रिपरिषद से स्वतंत्र होकर कार्य करता है। इसलिए 'केवल 2' और 'दोनों' गलत हैं, और 'न तो 1, न ही 2' सही कथन 1 की अनदेखी करता है।

Q6. निम्नलिखित में से कौन-सा/से विषय राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र दिल्ली की विधान सभा की विधायी शक्ति से बाहर है/हैं?
1. लोक व्यवस्था
2. पुलिस
3. भूमि
4. लोक स्वास्थ्य
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 1, 2 और 3
  3. केवल 2, 3 और 4
  4. 1, 2, 3 और 4
उत्तर देखें

उत्तर: B. केवल 1, 2 और 3

अनुच्छेद 239कक लोक व्यवस्था, पुलिस और भूमि को संघ के पास रखता है। लोक स्वास्थ्य राज्य सूची का विषय है जिस पर दिल्ली विधान सभा विधि बना सकती है, इसलिए 4 वाले विकल्प गलत हैं, और 'केवल 1 और 2' भूमि को छोड़ देता है।

Q7. सूची I (अनुच्छेद) को सूची II (राज्य) से सुमेलित कीजिए:
सूची I
A. अनुच्छेद 371क
B. अनुच्छेद 371छ
C. अनुच्छेद 371झ
D. अनुच्छेद 371ञ
सूची II
1. गोवा
2. कर्नाटक
3. नागालैंड
4. मिज़ोरम
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।

  1. A-3, B-4, C-1, D-2
  2. A-4, B-3, C-1, D-2
  3. A-3, B-4, C-2, D-1
  4. A-1, B-2, C-3, D-4
उत्तर देखें

उत्तर: A. A-3, B-4, C-1, D-2

371क नागालैंड, 371छ मिज़ोरम, 371झ गोवा और 371ञ कर्नाटक है। दूसरा विकल्प नागालैंड और मिज़ोरम को उलट देता है, तीसरा गोवा और कर्नाटक को, और चौथा कोई जोड़ी सही नहीं मिलाता।

Q8. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अनुच्छेद 240 राष्ट्रपति को लक्षद्वीप के लिए ऐसे विनियम बनाने देता है जो वहाँ लागू संसद के किसी अधिनियम को संशोधित कर सकें।
2. संसद किसी संघ राज्यक्षेत्र के लिए राज्य सूची के विषयों पर विधि नहीं बना सकती।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 2
  3. 1 और 2 दोनों
  4. न तो 1, न ही 2
उत्तर देखें

उत्तर: A. केवल 1

कथन 1 अनुच्छेद 240 के अधीन सही है। कथन 2 गलत है: अनुच्छेद 246(4) संसद को राज्यों से बाहर के क्षेत्रों के लिए किसी भी विषय पर, राज्य सूची के विषयों सहित, विधि बनाने देता है। इसलिए 'केवल 2' और 'दोनों' गलत हैं, और 'न तो 1, न ही 2' कथन 1 की अनदेखी करता है।

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