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अवसंरचना और उसका वित्तपोषण

उद्योग और अवसंरचना · भाग 3 / 3 · तथ्य-जाँच की तिथि · हम कैसे जाँचते हैं

स्रोतों (नीचे सूचीबद्ध) से AI की मदद से लिखा गया, फिर एक अलग AI से तथ्य-जाँच की गई।

अवसंरचना किसे कहते हैं और बाज़ार इसकी कम आपूर्ति क्यों करता है, समन्वित मास्टर सूची, सार्वजनिक-निजी भागीदारी के मॉडल (ईपीसी, बीओटी, बीओओटी, हाइब्रिड वार्षिकी, टीओटी), व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण, राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन, पीएम गति शक्ति और राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति, एनआईआईएफ, एनएबीएफआईडी, इनविट और रीट के माध्यम से दीर्घकालिक वित्त, राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन, तथा प्रमुख परिवहन, ऊर्जा और डिजिटल कार्यक्रम।

भाग 1 और 2 कारखानों और उन्हें चलाने वाली फ़र्मों के बारे में थे। यह अंतिम भाग उस ओर मुड़ता है जिस पर हर कारखाना, खेत और दफ़्तर निर्भर है पर जिसे वह स्वयं शायद ही बनाता है: सड़कें, रेलवे, बंदरगाह, हवाई अड्डे, बिजली लाइनें, पाइपलाइनें, जल प्रणालियाँ और दूरसंचार नेटवर्क। ऐसी अवसंरचना महँगी होती है, धीरे बनती है और दशकों चलती है, इसलिए असली प्रश्न यह नहीं कि भारत को इसकी और ज़रूरत है या नहीं, बल्कि यह कि भुगतान कौन करे, जोखिम कौन उठाए और पैसा कैसे जुटाया जाए।

अर्थशास्त्री अवसंरचना को दो प्रकारों में बाँटते हैं। आर्थिक अवसंरचना, जैसे परिवहन, ऊर्जा और संचार, उत्पादन और व्यापार को सीधे सहारा देती है। सामाजिक अवसंरचना, जैसे विद्यालय, अस्पताल, जल आपूर्ति और स्वच्छता, लोगों के स्वास्थ्य और कौशल का निर्माण करती है। ऋण और नीति के उद्देश्य से कौन-सी परियोजनाएँ अवसंरचना मानी जाएँ, यह तय करने के लिए आर्थिक कार्य विभाग अवसंरचना उप-क्षेत्रों की एक समन्वित मास्टर सूची रखता है, जो पहली बार 2012 में अधिसूचित हुई और समय-समय पर संशोधित होती है। यह उप-क्षेत्रों को पाँच शीर्षकों में रखती है: परिवहन और लॉजिस्टिक्स, ऊर्जा, जल और स्वच्छता, संचार, तथा सामाजिक और वाणिज्यिक अवसंरचना। सूची में होना व्यवहार में मायने रखता है, क्योंकि ऋणदाता और नियामक इसी से तय करते हैं कि किन परियोजनाओं को अवसंरचना के लिए बनी आसान ऋण शर्तें, जैसे लंबी चुकौती अवधि, मिल सकती हैं।

केवल बाज़ार पर छोड़ने पर अवसंरचना की आपूर्ति प्रायः कम रहती है। राजमार्ग या बिजलीघर को शुरू में बहुत बड़ी राशि चाहिए और वह बीस-तीस वर्षों में पैसा लौटाता है; उसे प्रायः ऐसी भूमि चाहिए जिसका अधिग्रहण कठिन है; और उसके कई लाभ, जैसे सबके लिए तेज़ यात्रा या सड़क किनारे नई दुकानें, पूरी तरह वसूले नहीं जा सकते। कुछ परिसंपत्तियाँ, जैसे रेल पटरी या शहर की मुख्य जल लाइनें, प्राकृतिक एकाधिकार हैं जिनकी कीमतें विनियमित करनी पड़ती हैं। इसलिए दशकों तक राज्य ने अधिकांश अवसंरचना स्वयं बनाई, प्रायः इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण (ईपीसी) अनुबंधों से, जिनमें सरकार ठेकेदार को परिसंपत्ति बनाने का भुगतान करती है और स्वामित्व तथा पूरा राजस्व जोखिम अपने पास रखती है। सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) इससे आगे जाती है: निजी भागीदार लंबी अवधि के लिए परिसंपत्ति का वित्तपोषण, निर्माण या संचालन करता है और जोखिम राज्य के साथ बाँटता है।

सबसे प्रसिद्ध पीपीपी परिवार निर्माण-संचालन-हस्तांतरण (बीओटी) है। बीओटी (टोल) में निजी रियायतग्राही पैसा जुटाता है, सड़क बनाता है, निश्चित रियायत अवधि तक टोल वसूलता है और फिर परिसंपत्ति सरकार को लौटा देता है; वह निर्माण जोखिम और यातायात जोखिम दोनों उठाता है। बीओटी (वार्षिकी) में रियायतग्राही अब भी सड़क बनाता और रखरखाव करता है, पर टोल सरकार वसूलती है और रियायतग्राही को हर वर्ष एक निश्चित राशि, वार्षिकी, देती है, इसलिए यातायात जोखिम राज्य के पास रहता है। निर्माण-स्वामित्व-संचालन-हस्तांतरण (बीओओटी) बीओटी जैसा ही है, बस हस्तांतरण तक परिसंपत्ति का स्वामी भी निजी पक्ष रहता है। 2010 के दशक के आरंभ में कई बीओटी राजमार्ग परियोजनाएँ संकट में पड़ीं: यातायात अनुमान से कम रहा, भूमि अधिग्रहण और मंज़ूरियों में देरी हुई, और निजी डेवलपर बोली लगाने से हिचकने लगे।

सड़क पीपीपी को फिर से गति देने के लिए सरकार ने 2016 में हाइब्रिड वार्षिकी मॉडल (हैम) को मंज़ूरी दी। निर्माण के दौरान सरकार परियोजना लागत का 40 प्रतिशत प्रगति से जुड़ी किस्तों में देती है और शेष 60 प्रतिशत डेवलपर जुटाता है। सड़क पूरी होने पर टोल सरकार वसूलती है और डेवलपर का हिस्सा रियायत अवधि में ब्याज सहित छमाही वार्षिकियों के रूप में लौटाती है, तथा रखरखाव का भुगतान अलग से करती है। इस प्रकार डेवलपर कोई यातायात जोखिम नहीं उठाता। टोल-संचालन-हस्तांतरण (टीओटी), जिसे भी 2016 में मंज़ूरी मिली, उलटी दिशा में काम करता है: यह उन राजमार्गों के लिए है जो पहले से बने हैं और टोल कमा रहे हैं। निजी निवेशक लंबी अवधि (पहले दौरों में 30 वर्ष) तक टोल वसूलने और सड़क का रखरखाव करने के अधिकार के लिए शुरू में एकमुश्त राशि देता है, जिसके बाद सड़क राजमार्ग प्राधिकरण को लौट जाती है।

अवसंरचना बनाने और चलाने के मॉडल (मुख्य उदाहरण राजमार्ग)
मॉडलनिर्माण का भुगतान कौन करता हैटोल कौन वसूलता हैयातायात जोखिम कौन उठाता है
ईपीसीसरकार (ठेकेदार को शुल्क)सरकारसरकार
बीओटी (टोल)निजी रियायतग्राहीरियायतग्राही, रियायत अवधि तकरियायतग्राही
बीओटी (वार्षिकी)निजी रियायतग्राहीसरकार, जो निश्चित वार्षिकी देती हैसरकार
बीओओटीनिजी पक्ष, जो हस्तांतरण तक परिसंपत्ति का स्वामी भी हैनिजी पक्षनिजी पक्ष
हाइब्रिड वार्षिकी (2016)निर्माण के दौरान सरकार 40%, डेवलपर 60%सरकार, जो डेवलपर को छमाही वार्षिकियों में भुगतान करती हैसरकार
टीओटी (2016)पहले से बनी; निवेशक शुरू में एकमुश्त राशि देता हैनिवेशक, लंबी अवधि तक (पहले दौरों में 30 वर्ष)निवेशक

कुछ परियोजनाएँ समाज के लिए उपयोगी होती हैं पर अपने बल पर इतना नहीं कमा पातीं कि निजी भागीदार आकर्षित हो। व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (वीजीएफ), आर्थिक कार्य विभाग की 2006 में शुरू हुई योजना, पीपीपी परियोजनाओं को एक बार के पूँजीगत अनुदान से यह अंतर पाटती है। केंद्र कुल परियोजना लागत का अधिकतम 20 प्रतिशत दे सकता है, और परियोजना को प्रायोजित करने वाली सरकार या प्राधिकरण अधिकतम 20 प्रतिशत और जोड़ सकता है। अनुदान निर्माण के दौरान, निजी भागीदार द्वारा अपनी इक्विटी लगाने के बाद, जारी होता है, और भागीदार खुली बोली से चुना जाता है जिसमें सबसे कम अनुदान माँगने वाला बोलीदाता सामान्यतः जीतता है। 2020 के पुनर्गठन ने कुछ सामाजिक क्षेत्र की परियोजनाओं, जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा, जल आपूर्ति और अपशिष्ट उपचार, को केंद्र से अधिकतम 30 प्रतिशत और प्रायोजक से 30 प्रतिशत पाने की अनुमति दी। वीजीएफ पूँजीगत लागत में सहायता करता है; यह लाभ की गारंटी नहीं देता।

नियोजन अलग-अलग परियोजनाओं से हटकर राष्ट्रीय पाइपलाइनों पर आ गया है। राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (एनआईपी), जिसकी घोषणा 31 दिसंबर 2019 को हुई और जिसे 2020 में उसके कार्यबल की अंतिम रिपोर्ट ने बढ़ाया, ने 2019-20 से 2024-25 के लिए लगभग 111 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाएँ सूचीबद्ध कीं, जिनमें अधिकांश राशि ऊर्जा, सड़कों, शहरी अवसंरचना और रेलवे की थी; केंद्र और राज्यों को लगभग दो-पाँचवाँ भाग प्रत्येक तथा निजी क्षेत्र को लगभग पाँचवाँ भाग वित्तपोषित करना था। क्योंकि मंत्रालय प्रायः अपनी परियोजनाएँ अलग-थलग बनाते थे, 13 अक्टूबर 2021 को शुरू हुए पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान ने उन्हें मंत्रालयों और राज्यों द्वारा साझा किए जाने वाले एक जीआईएस-आधारित डिजिटल मानचित्र पर रखा। 17 सितंबर 2022 की राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति का लक्ष्य माल ढुलाई की लागत को वैश्विक मानकों तक लाना और 2030 तक भारत को विश्व बैंक के लॉजिस्टिक्स प्रदर्शन सूचकांक में शीर्ष 25 देशों में पहुँचाना है।

इस सबका भुगतान सबसे कठिन हिस्सा है। बैंक अधिकतर पैसा जमाओं के रूप में जुटाते हैं जिन्हें बचतकर्ता कुछ वर्षों में निकाल सकते हैं, जबकि अवसंरचना ऋण पंद्रह से पच्चीस वर्षों के होते हैं। इस परिसंपत्ति-देयता बेमेल ने, रुकी हुई परियोजनाओं के साथ मिलकर, 2010 के दशक में बैंकों पर भारी डूबे ऋण छोड़ दिए। इसका उत्तर विशेष दीर्घकालिक ऋणदाताओं और निवेशकों का निर्माण रहा है। राष्ट्रीय निवेश और अवसंरचना कोष (एनआईआईएफ), जो 2015 में सेबी में पंजीकृत निवेश कोष के रूप में बना, सरकार (जिसकी हिस्सेदारी 49 प्रतिशत है) और पेंशन तथा संप्रभु धन कोष जैसे देशी-विदेशी निवेशकों से पैसा जुटाता है। एनएबीएफआईडी अधिनियम, 2021 से बना राष्ट्रीय अवसंरचना और विकास वित्तपोषण बैंक (एनएबीएफआईडी) एक विकास वित्त संस्था है जो अवसंरचना को ऋण देता है और दीर्घकालिक बॉन्डों का बाज़ार विकसित करने में सहायता करता है; अधिनियम के अनुसार केंद्र के पास इसके कम से कम 26 प्रतिशत शेयर रहने चाहिए।

दो बाज़ार साधन आम निवेशकों को तैयार परिसंपत्तियों में पैसा लगाने देते हैं। अवसंरचना निवेश न्यास (इनविट) और रियल एस्टेट निवेश न्यास (रीट), दोनों 2014 के सेबी विनियमों से शासित, आय देने वाली परिसंपत्तियों के स्वामी म्यूचुअल फ़ंड की तरह काम करते हैं: इनविट टोल सड़कें, पारेषण लाइनें या पाइपलाइनें रखता है, जबकि रीट दफ़्तर परिसरों जैसी किराया देने वाली वाणिज्यिक संपत्ति रखता है। निवेशक ऐसी इकाइयाँ खरीदते हैं जिनका स्टॉक एक्सचेंज पर व्यापार होता है, और न्यास को अपने शुद्ध वितरण योग्य नकद प्रवाह का कम से कम 90 प्रतिशत उन्हें देना होता है। यही विचार परिसंपत्ति मुद्रीकरण के पीछे है। 23 अगस्त 2021 को नीति आयोग द्वारा जारी राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन ने 2021-22 से 2024-25 तक सड़कों, रेलवे स्टेशनों, बिजली लाइनों और गैस पाइपलाइनों जैसी केंद्र की ब्राउनफ़ील्ड परिसंपत्तियों को पट्टे पर देकर लगभग 6 लाख करोड़ रुपये का अनुमान लगाया। स्वामित्व सरकार के पास रहता है, पट्टा समाप्त होने पर परिसंपत्तियाँ लौट आती हैं, और भूमि बेची नहीं जाती।

दीर्घकालिक अवसंरचना वित्त की संस्थाएँ और साधन
नामआधार और वर्षक्या करता है
एनआईआईएफसेबी में पंजीकृत निवेश कोष, 2015सरकार (49%) और देशी-विदेशी निवेशकों से पैसा जुटाता है
एनएबीएफआईडीएनएबीएफआईडी अधिनियम, 2021अवसंरचना को ऋण देने वाली विकास वित्त संस्था; केंद्र के पास कम से कम 26%
इनविटसेबी विनियम, 2014आय देने वाली अवसंरचना का स्वामी न्यास; सूचीबद्ध इकाइयाँ; शुद्ध वितरण योग्य नकद प्रवाह का कम से कम 90% वितरित
रीटसेबी विनियम, 2014किराया देने वाली वाणिज्यिक संपत्ति का स्वामी न्यास; वही वितरण नियम
राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइननीति आयोग, 23 अगस्त 20212021-22 से 2024-25 तक केंद्र की ब्राउनफ़ील्ड परिसंपत्तियों को पट्टे पर देकर लगभग 6 लाख करोड़ रुपये; स्वामित्व या भूमि की बिक्री नहीं

कई बड़े परिवहन कार्यक्रम इस पाइपलाइन को भरते हैं। 2017 में स्वीकृत भारतमाला परियोजना राष्ट्रीय राजमार्गों का छत्र कार्यक्रम है, जिसमें आर्थिक गलियारे, सीमा और तटीय सड़कें तथा एक्सप्रेसवे शामिल हैं। 2015 में स्वीकृत सागरमाला का लक्ष्य बंदरगाह-आधारित विकास है: बंदरगाहों का आधुनिकीकरण, उन्हें भीतरी इलाक़ों से जोड़ना और तटीय पोत परिवहन तथा उद्योग को बढ़ाना। भारतीय समर्पित माल गलियारा निगम द्वारा बनाए गए समर्पित माल गलियारे मालगाड़ियों को यात्री यातायात से अलग करते हैं: पूर्वी गलियारा पंजाब में लुधियाना के पास से बिहार में सोननगर तक, और पश्चिमी गलियारा दिल्ली के पास दादरी से मुंबई के पास जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह तक जाता है। 2016 में शुरू हुई क्षेत्रीय संपर्क योजना उड़ान ('उड़े देश का आम नागरिक') विमान कंपनियों को एक सब्सिडी, जिसे भी व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण कहा जाता है, और अन्य रियायतें देती है ताकि छोटे और सेवा-रहित हवाई अड्डों की उड़ानें किफ़ायती रहें।

ऊर्जा और डिजिटल नेटवर्क दूसरे स्तंभ हैं। बिजली समवर्ती सूची का विषय है, इसलिए संसद और राज्य विधानमंडल दोनों इस पर क़ानून बनाते हैं। विद्युत अधिनियम, 2003 ने उत्पादन, पारेषण और वितरण को अलग किया, अधिकांश नए उत्पादन संयंत्रों के लिए लाइसेंस की आवश्यकता हटाई और केंद्र तथा राज्यों में नियामक आयोग बनाए; सबसे कमज़ोर कड़ी राज्य वितरण कंपनियाँ बनी हुई हैं, जिनके घाटे बार-बार लौटते हैं। स्वच्छ बिजली पर भारत की अगस्त 2022 की अद्यतन जलवायु प्रतिज्ञा ने वचन दिया कि 2030 तक स्थापित बिजली क्षमता का आधा ग़ैर-जीवाश्म होगा; नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने जुलाई 2025 में बताया कि यह हिस्सा पहले ही 50 प्रतिशत तक पहुँच चुका है। भारतनेट, जो 2011 में राष्ट्रीय ऑप्टिकल फ़ाइबर नेटवर्क के रूप में शुरू हुआ, हर ग्राम पंचायत तक ब्रॉडबैंड पहुँचा रहा है, और इसका वित्तपोषण डिजिटल भारत निधि से होता है, जो दूरसंचार अधिनियम, 2023 के अंतर्गत सार्वभौमिक सेवा दायित्व कोष का नया नाम है।

कुल मिलाकर यह अध्याय दिखाता है कि राज्य का अर्थव्यवस्था से संबंध कैसे बदला। उद्योग में उसने लाइसेंस देना बंद कर विनियमन और प्रोत्साहन देना शुरू किया; अवसंरचना में वह ईपीसी अनुबंधों से सब कुछ बनाने से हटकर बीओटी, हैम और टीओटी के ज़रिए निजी भागीदारों के साथ जोखिम बाँटने, व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण से कमी पूरी करने, और इनविट तथा मुद्रीकरण से तैयार परिसंपत्तियों का मूल्य फिर से उपयोग में लाने की ओर बढ़ा। हर मॉडल में एक अच्छी सार्वजनिक-निजी भागीदारी की एक ही कसौटी है: हर जोखिम उस पक्ष के पास हो जो उसे सबसे अच्छी तरह संभाल सके, निर्माण जोखिम निर्माता के पास और यातायात या नीति जोखिम प्रायः राज्य के पास, और यही बँटवारा ग़लत होने से अतीत में कई परियोजनाएँ रुकीं।

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पुनरावृत्ति

अभ्यास प्रश्न

Q1. राजमार्ग परियोजनाओं के हाइब्रिड वार्षिकी मॉडल में निर्माण के दौरान सरकार परियोजना लागत का कितना हिस्सा देती है?

  1. 20 प्रतिशत
  2. 40 प्रतिशत
  3. 60 प्रतिशत
  4. 100 प्रतिशत
उत्तर देखें

उत्तर: B. 40 प्रतिशत

निर्माण के दौरान सरकार किस्तों में 40 प्रतिशत देती है और डेवलपर 60 प्रतिशत जुटाता है। 20 प्रतिशत व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण, एक अलग योजना, में केंद्र की सीमा है; 60 प्रतिशत डेवलपर का हिस्सा है; 100 प्रतिशत ईपीसी अनुबंध का वर्णन है।

Q2. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. टोल-संचालन-हस्तांतरण मॉडल में निजी निवेशक पहले से बने राजमार्ग पर टोल वसूलने के अधिकार के लिए शुरू में एकमुश्त राशि देता है।
2. निर्माण-संचालन-हस्तांतरण (वार्षिकी) मॉडल में यातायात जोखिम निजी रियायतग्राही उठाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 2
  3. 1 और 2 दोनों
  4. न तो 1 और न ही 2
उत्तर देखें

उत्तर: A. केवल 1

कथन 1 सही है: टीओटी बनी हुई, टोल कमाने वाली सड़कों का मुद्रीकरण करता है। कथन 2 गलत है: बीओटी (वार्षिकी) में टोल सरकार वसूलती है और निश्चित वार्षिकी देती है, इसलिए यातायात जोखिम उसका है; बीओटी (टोल) में यह रियायतग्राही उठाता है। इसलिए 'केवल 2', 'दोनों' और 'कोई नहीं' गलत हैं।

Q3. राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इसमें सार्वजनिक परिसंपत्तियों का स्वामित्व निजी पक्षों को हस्तांतरित किया जाता है।
2. इसमें पहले से बनी ब्राउनफ़ील्ड परिसंपत्तियाँ शामिल हैं।
3. इसे नीति आयोग ने तैयार किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3
उत्तर देखें

उत्तर: B. केवल 2 और 3

कथन 2 और 3 सही हैं: नीति आयोग ने 23 अगस्त 2021 को केंद्र की ब्राउनफ़ील्ड परिसंपत्तियों के लिए यह पाइपलाइन जारी की। कथन 1 गलत है: परिसंपत्तियाँ पट्टे पर दी जाती हैं, स्वामित्व सरकार के पास रहता है और भूमि बेची नहीं जाती। इसलिए कथन 1 वाला हर विकल्प गलत है।

Q4. सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए:
सूची I
A. एनएबीएफआईडी
B. एनआईआईएफ
C. इनविट
D. व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण
सूची II
1. 2021 में बनी सांविधिक विकास वित्त संस्था
2. 2015 में बना सेबी-पंजीकृत कोष जिसमें सरकार की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी है
3. ऐसा न्यास जिसकी इकाइयों का स्टॉक एक्सचेंज पर व्यापार होता है और जो आय देने वाली अवसंरचना का स्वामी है
4. पीपीपी परियोजनाओं को एक बार का पूँजीगत अनुदान
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

  1. A-1, B-2, C-3, D-4
  2. A-2, B-1, C-3, D-4
  3. A-1, B-2, C-4, D-3
  4. A-2, B-1, C-4, D-3
उत्तर देखें

उत्तर: A. A-1, B-2, C-3, D-4

एनएबीएफआईडी 2021 की सांविधिक विकास वित्त संस्था है (A-1), एनआईआईएफ सरकार की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी वाला 2015 का कोष (B-2), इनविट अवसंरचना का स्वामी सूचीबद्ध न्यास (C-3) और वीजीएफ पूँजीगत अनुदान (D-4)। दूसरा और चौथा कूट एनएबीएफआईडी और एनआईआईएफ को उलट देते हैं; तीसरा और चौथा इनविट और वीजीएफ को।

Q5. भारत में अवसंरचना निवेश न्यासों (इनविट) और रियल एस्टेट निवेश न्यासों (रीट) का विनियमन निम्नलिखित में से कौन करता है?

  1. भारतीय रिज़र्व बैंक
  2. भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड
  3. भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण
  4. नीति आयोग
उत्तर देखें

उत्तर: B. भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड

इनविट और रीट 2014 के सेबी विनियमों से शासित हैं क्योंकि उनकी इकाइयाँ स्टॉक एक्सचेंज पर व्यापार होने वाली प्रतिभूतियाँ हैं। आरबीआई बैंकों और एनबीएफसी का, आईआरडीएआई बीमाकर्ताओं का विनियमन करता है, और नीति आयोग एक नीति निकाय है जिसने मुद्रीकरण पाइपलाइन बनाई पर किसी बाज़ार का विनियमन नहीं करता।

Q6. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान मंत्रालयों के बीच अवसंरचना के समन्वित नियोजन के लिए एक जीआईएस-आधारित डिजिटल मंच है।
2. राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति का लक्ष्य 2030 तक भारत को लॉजिस्टिक्स प्रदर्शन सूचकांक में शीर्ष 10 देशों में पहुँचाना है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 2
  3. 1 और 2 दोनों
  4. न तो 1 और न ही 2
उत्तर देखें

उत्तर: A. केवल 1

कथन 1 सही है: गति शक्ति (13 अक्टूबर 2021) विभिन्न मंत्रालयों की योजनाओं को एक साझा मानचित्र पर रखती है। कथन 2 गलत है: 2022 की नीति का लक्ष्य शीर्ष 25 है, शीर्ष 10 नहीं। इसलिए 'केवल 2', 'दोनों' और 'कोई नहीं' गलत हैं।

Q7. 2006 की व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण योजना के अंतर्गत किसी सामान्य पीपीपी अवसंरचना परियोजना को केंद्र सरकार का अनुदान कुल परियोजना लागत का अधिकतम कितना हिस्सा हो सकता है?

  1. 10 प्रतिशत
  2. 20 प्रतिशत
  3. 40 प्रतिशत
  4. 50 प्रतिशत
उत्तर देखें

उत्तर: B. 20 प्रतिशत

केंद्र अधिकतम 20 प्रतिशत दे सकता है, और प्रायोजक प्राधिकरण अधिकतम 20 प्रतिशत और। 40 प्रतिशत दोनों की संयुक्त सीमा है, केंद्र का हिस्सा नहीं; 10 और 50 प्रतिशत योजना से मेल नहीं खाते। 2020 से कुछ सामाजिक क्षेत्र की परियोजनाओं को केंद्र से 30 प्रतिशत तक मिल सकता है, पर प्रश्न सामान्य परियोजना के बारे में है।

Q8. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बिजली सातवीं अनुसूची की समवर्ती सूची का विषय है।
2. पश्चिमी समर्पित माल गलियारा दादरी को जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह से जोड़ता है।
3. भारतनेट राष्ट्रीय ऑप्टिकल फ़ाइबर नेटवर्क के रूप में शुरू हुआ।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं
उत्तर देखें

उत्तर: C. सभी तीन

तीनों सही हैं: बिजली समवर्ती सूची में है, पश्चिमी गलियारा दिल्ली के पास दादरी से मुंबई के पास जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह तक जाता है, और भारतनेट 2011 में शुरू हुए राष्ट्रीय ऑप्टिकल फ़ाइबर नेटवर्क से निकला। इसलिए 'केवल एक', 'केवल दो' और 'कोई नहीं' गलत हैं।

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