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त्वरित पुनरावृत्ति: एक पृष्ठ पर ब्रिटिश शासन का आर्थिक प्रभाव

ब्रिटिश शासन का आर्थिक प्रभाव · त्वरित पुनरावृत्ति · तथ्य-जाँच की तिथि · हम कैसे जाँचते हैं

स्रोतों (नीचे सूचीबद्ध) से AI की मदद से लिखा गया, फिर एक अलग AI से तथ्य-जाँच की गई।

अध्याय के दोनों भाग त्वरित पुनरावृत्ति के लिए संक्षेप में: स्थायी बंदोबस्त, रैयतवाड़ी और महालवाड़ी, वाणिज्यीकरण और ग्रामीण ऋण; धन का निष्कासन, विऔद्योगीकरण, रेलवे और गारंटी प्रणाली, पहले आधुनिक उद्योग और अकाल नीति।

यह अध्याय दिखाता है कि 1765 में दीवानी मिलने से बीसवीं शताब्दी के आरंभ तक ब्रिटिश शासन ने भारत की अर्थव्यवस्था को कैसे बदला। भाग 1 भूमि पर था: राजस्व कौन चुकाए, कितना और कितने समय के लिए, और इसका किसानों पर क्या असर हुआ। भाग 2 व्यापक अर्थव्यवस्था पर था: धन का निष्कासन, शिल्पों का पतन, रेलवे, पहले आधुनिक उद्योग और अकाल। एक सूत्र दोनों को जोड़ता है: अर्थव्यवस्था इस तरह संगठित की गई कि राज्य को बड़ा, स्थिर राजस्व मिले और ब्रिटेन को सस्ता कच्चा माल और खुला बाज़ार।

वॉरेन हेस्टिंग्स की राजस्व ठेकेदारी (1772) और वार्षिक बंदोबस्त (1777) विफल होने के बाद कॉर्नवालिस ने 1793 में स्थायी बंदोबस्त किया: बंगाल और बिहार के ज़मींदार भूमि के स्वामी बने और उनका राजस्व सूर्यास्त क़ानून के अधीन सदा के लिए निश्चित हुआ। अनेक पुराने परिवारों की संपदाएँ नीलाम हुईं, बिचौलियों की परतें बनीं, और 1859 के लगान अधिनियम और 1885 के काश्तकारी अधिनियम तक काश्तकारों को कम सुरक्षा थी। मद्रास और बंबई में रीड और मुनरो की रैयतवाड़ी व्यवस्था व्यवस्था ने हर किसान के साथ बंदोबस्त किया, हर बीस से तीस वर्ष में पुनरीक्षण के साथ, और राज्य स्वयं भूस्वामी की तरह रहा। उत्तर-पश्चिमी प्रांतों में महालवाड़ी व्यवस्था व्यवस्था (1822 का विनियम VII, 1833 के विनियम IX से संशोधित) ने पूरे गाँव या संपदा के साथ बंदोबस्त किया।

निश्चित तिथियों पर नक़द राजस्व ने कृषि का वाणिज्यीकरण को आगे बढ़ाया: नील (और 1859–60 का नील विद्रोह), कपास, जूट, अफ़ीम और चाय। अमेरिकी गृहयुद्ध (1861–65) के समय का कपास-उछाल युद्ध के बाद ढह गया, और साहूकार का ऋण ग्रामीण जीवन का सबसे भारी बोझ बन गया। पूना और अहमदनगर के किसानों ने 1875 के दक्कन दंगों में साहूकारों के विरुद्ध विद्रोह किया, जिसके बाद दक्कन कृषक राहत अधिनियम (1879) आया; पंजाब भूमि हस्तांतरण अधिनियम (1900) ने ग़ैर-कृषक समूहों को भूमि के हस्तांतरण को सीमित किया।

एक नज़र में ब्रिटिश शासन का आर्थिक प्रभाव
विषयमुख्य तथ्य
स्थायी बंदोबस्तकॉर्नवालिस, 1793; ज़मींदार स्वामी; राजस्व सदा के लिए निश्चित; सूर्यास्त क़ानून; बंगाल और बिहार
रैयतवाड़ीरीड और मुनरो (बारामहल 1792); मद्रास में 1820 से, बंबई; अलग-अलग रैयत; हर 20–30 वर्ष में पुनरीक्षण
महालवाड़ीहोल्ट मैकेंज़ी, 1822 का विनियम VII; 1833 का विनियम IX; गाँव या संपदा; लंबरदार
ग्रामीण ऋणदक्कन दंगे 1875; दक्कन कृषक राहत अधिनियम 1879; पंजाब भूमि हस्तांतरण अधिनियम 1900
धन का निष्कासननौरोजी, पॉवर्टी एंड अन-ब्रिटिश रूल इन इंडिया (1901); होम चार्जेज़; आर. सी. दत्त; रानडे
व्यापार और शिल्प1813 और 1833 के चार्टर अधिनियम; एकतरफ़ा मुक्त व्यापार; विऔद्योगीकरण
रेलवे और डाकडलहौज़ी का मिनट 1853; बंबई–ठाणे 16 अप्रैल 1853; गारंटी प्रणाली; डाकघर अधिनियम 1854
उद्योगबंबई की सूती मिल 1854; रिशरा की जूट मिल 1855; टिस्को 1907
अकाल नीति1880 (स्ट्रेची), 1898 (लायल), 1901 (मैकडॉनेल) के आयोग; अकाल संहिताएँ; बंगाल 1943

धन का निष्कासन भारत के उत्पादन का वह भाग था जो बिना किसी बदले के ब्रिटेन भेजा जाता था; लंदन में चुकाए जाने वाले होम चार्जेज़ उसकी सबसे बड़ी मद थे। दादाभाई नौरोजी (पॉवर्टी एंड अन-ब्रिटिश रूल इन इंडिया, 1901), आर. सी. दत्त (द इकोनॉमिक हिस्ट्री ऑफ़ इंडिया) और एम. जी. रानडे ने इसे औपनिवेशिक शासन की आलोचना में बदल दिया। 1813 और 1833 के चार्टर अधिनियमों द्वारा भारत को ब्रिटिश माल के लिए खोलने के बाद एकतरफ़ा मुक्त व्यापार और लंकाशायर के मशीनी कपड़े से विऔद्योगीकरण हुआ, जिसने कारीगरों को भूमि की ओर धकेला।

डलहौज़ी के रेलवे मिनट (1853) और बंबई से ठाणे की पहली ट्रेन (16 अप्रैल 1853) से एक ऐसा जाल शुरू हुआ जिसे निजी कंपनियों ने गारंटी प्रणाली के अंतर्गत बनाया और जो मुख्यतः आंतरिक भागों को बंदरगाहों से जोड़ने के लिए बिछाया गया। तार और 1854 के डाकघर अधिनियम ने नए संचार को पूरा किया। आधुनिक उद्योग बंबई की पहली सूती मिल (1854), रिशरा की जूट मिल (1855), कोयले और बागानों से शुरू होकर टिस्को (1907) के साथ इस्पात तक पहुँचा, पर प्रशुल्क संरक्षण के बिना छोटा रहा। अकालों, विशेषकर 1876–78 के अकाल, के बाद 1880 (स्ट्रेची), 1898 (लायल) और 1901 (मैकडॉनेल) के अकाल आयोग और अकाल संहिताएँ आईं। आरंभिक राष्ट्रवादियों की आर्थिक आलोचना ने इन सभी सूत्रों को एक साथ जोड़ा।

परीक्षा में ध्यान दें

पुनरावृत्ति

अभ्यास प्रश्न

Q1. किस भू-राजस्व व्यवस्था में राजस्व माँग सदा के लिए निश्चित की गई?

  1. रैयतवाड़ी
  2. महालवाड़ी
  3. स्थायी बंदोबस्त
  4. 1772 की राजस्व ठेकेदारी
उत्तर देखें

उत्तर: C. स्थायी बंदोबस्त

(c) सही है: कॉर्नवालिस के 1793 के बंदोबस्त ने माँग सदा के लिए निश्चित की। (a) और (b) में समय-समय पर पुनरीक्षण होता था; (d) हेस्टिंग्स की 1772 की ठेकेदारी केवल पाँच वर्ष के लिए थी।

Q2. सूची I (व्यक्ति) को सूची II (संबंधित) से सुमेलित कीजिए:
सूची I: 1. थॉमस मुनरो 2. होल्ट मैकेंज़ी 3. कॉर्नवालिस
सूची II: A. महालवाड़ी B. स्थायी बंदोबस्त C. रैयतवाड़ी
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।

  1. 1-A, 2-C, 3-B
  2. 1-C, 2-A, 3-B
  3. 1-C, 2-B, 3-A
  4. 1-B, 2-A, 3-C
उत्तर देखें

उत्तर: B. 1-C, 2-A, 3-B

(b) सही है: मुनरो रैयतवाड़ी से, होल्ट मैकेंज़ी महालवाड़ी से, कॉर्नवालिस स्थायी बंदोबस्त से। (a) मुनरो और मैकेंज़ी को बदलता है; (c) मैकेंज़ी और कॉर्नवालिस को; (d) स्थायी बंदोबस्त को मुनरो से जोड़ता है।

Q3. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 1875 के दक्कन दंगे मुख्यतः साहूकारों के विरुद्ध थे।
2. 1900 के पंजाब भूमि हस्तांतरण अधिनियम ने पंजाब का भू-राजस्व स्थायी रूप से निश्चित किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 2
  3. 1 और 2 दोनों
  4. न तो 1 और न ही 2
उत्तर देखें

उत्तर: A. केवल 1

केवल 1 सही है। 1900 के अधिनियम ने कृषक से ग़ैर-कृषक समूहों को भूमि हस्तांतरण सीमित किया; उसने राजस्व निश्चित नहीं किया, इसलिए कथन 2 ग़लत है और (b), (c) तथा (d) ग़लत हैं।

Q4. निम्नलिखित में से किसने द इकोनॉमिक हिस्ट्री ऑफ़ इंडिया लिखी?

  1. दादाभाई नौरोजी
  2. आर. सी. दत्त
  3. एम. जी. रानडे
  4. जी. वी. जोशी
उत्तर देखें

उत्तर: B. आर. सी. दत्त

(b) सही है। (a) नौरोजी ने पॉवर्टी एंड अन-ब्रिटिश रूल इन इंडिया लिखी; (c) रानडे ने एसेज़ ऑन इंडियन इकोनॉमिक्स लिखी; (d) जी. वी. जोशी आर्थिक आलोचक थे पर यह पुस्तक उनकी नहीं है।

Q5. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 1833 के चार्टर अधिनियम ने ईस्ट इंडिया कंपनी का वाणिज्यिक कारोबार समाप्त किया।
2. होम चार्जेज़ में रेलवे कंपनियों को गारंटी किया गया ब्याज शामिल था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 2
  3. 1 और 2 दोनों
  4. न तो 1 और न ही 2
उत्तर देखें

उत्तर: C. 1 और 2 दोनों

(c) सही है: दोनों कथन सत्य हैं। 1833 के अधिनियम ने कंपनी का व्यापार समाप्त किया, और रेलवे का गारंटीशुदा ब्याज होम चार्जेज़ के भाग के रूप में लंदन में चुकाया जाता था। अतः (a), (b) और (d) ग़लत हैं।

Q6. निम्नलिखित को कालक्रम में व्यवस्थित कीजिए:
1. स्थायी बंदोबस्त
2. भारत की पहली यात्री ट्रेन
3. दक्कन दंगे
4. टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।

  1. 1-2-3-4
  2. 1-3-2-4
  3. 2-1-3-4
  4. 1-2-4-3
उत्तर देखें

उत्तर: A. 1-2-3-4

(a) सही है: 1793, 1853, 1875 और 1907। (b) दक्कन दंगों को पहली ट्रेन से पहले रखता है; (c) ट्रेन को 1793 से पहले; (d) टिस्को को दंगों से पहले।

Q7. पहले भारतीय अकाल आयोग, जिसकी रिपोर्ट 1880 में आई, के अध्यक्ष कौन थे?

  1. जेम्स लायल
  2. एंटनी मैकडॉनेल
  3. रिचर्ड स्ट्रेची
  4. जॉन वुडहेड
उत्तर देखें

उत्तर: C. रिचर्ड स्ट्रेची

(c) सही है: 1876–78 के अकाल के बाद बने आयोग के अध्यक्ष स्ट्रेची थे। (a) लायल आयोग 1898 का; (b) मैकडॉनेल आयोग 1901 का; (d) वुडहेड 1943 के बंगाल अकाल पर अकाल जाँच आयोग के अध्यक्ष थे।

Q8. उन्नीसवीं शताब्दी के भारत में ब्रिटिश आर्थिक नीति के परिणाम निम्नलिखित में से कौन-से थे?
1. जनसंख्या का अधिक बड़ा भाग कृषि पर निर्भर हो गया।
2. जूट और चाय पर भारतीय स्वामित्व वाले उद्योग का वर्चस्व हो गया।
3. निश्चित तिथियों पर नक़द राजस्व ने किसानों को बिक्री के लिए उगाई जाने वाली फ़सलों की ओर धकेला।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 1 और 3
  3. केवल 2 और 3
  4. 1, 2 और 3
उत्तर देखें

उत्तर: B. केवल 1 और 3

(b) सही है। कथन 2 ग़लत है: जूट और चाय पर यूरोपीय पूँजी हावी थी, जबकि भारतीय उद्यम सूती वस्त्र में सबसे मज़बूत था; इसलिए 2 वाले (a), (c) और (d) ग़लत हैं।

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