ऐप में पढ़ें →

English · हिन्दी · తెలుగు · தமிழ் · മലയാളം · मराठी · ಕನ್ನಡ

ब्रिटिश शासन का आर्थिक प्रभाव

ब्रिटिश शासन का आर्थिक प्रभाव: UPSC प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के लिए 2 भागों में पूरा अध्याय, हर भाग में तालिकाएँ, परीक्षा में ध्यान देने योग्य बातें, पुनरावृत्ति और अभ्यास प्रश्न।

त्वरित पुनरावृत्ति: त्वरित पुनरावृत्ति: एक पृष्ठ पर ब्रिटिश शासन का आर्थिक प्रभाव

अध्याय के दोनों भाग त्वरित पुनरावृत्ति के लिए संक्षेप में: स्थायी बंदोबस्त, रैयतवाड़ी और महालवाड़ी, वाणिज्यीकरण और ग्रामीण ऋण; धन का निष्कासन, विऔद्योगीकरण, रेलवे और गारंटी प्रणाली, पहले आधुनिक उद्योग और अकाल नीति।

इस अध्याय के भाग

भाग 1

भू-राजस्व और कृषि अर्थव्यवस्था

दीवानी के बाद भू-राजस्व का महत्त्व, वॉरेन हेस्टिंग्स की राजस्व ठेकेदारी, कॉर्नवालिस का स्थायी बंदोबस्त (1793) और उसके प्रभाव, रीड और मुनरो की रैयतवाड़ी व्यवस्था (मद्रास, बंबई), महालवाड़ी व्यवस्था (1822 का विनियम VII, 1833 का विनियम IX), तीनों की तुलना, कृषि का वाणिज्यीकरण, और दक्कन दंगों (1875) से पंजाब भूमि हस्तांतरण अधिनियम (1900) तक ग्रामीण ऋण।
भाग 2

धन का निष्कासन, विऔद्योगीकरण और औपनिवेशिक अर्थव्यवस्था

धन का निष्कासन और होम चार्जेज़, नौरोजी, आर. सी. दत्त और रानडे की आलोचना, 1813 और 1833 के चार्टर अधिनियमों तथा एकतरफ़ा मुक्त व्यापार के बाद विऔद्योगीकरण, डलहौज़ी के मिनट (1853) से रेलवे और गारंटी प्रणाली, तार और 1854 का डाकघर अधिनियम, पहली सूती और जूट मिलें और टिस्को (1907), अकाल और 1880, 1898 तथा 1901 के अकाल आयोग, और आरंभिक राष्ट्रवाद की आर्थिक आलोचना।

ऐप में यही अध्याय पढ़ें: अपनी भाषा में मदद, अभ्यास प्रश्नों पर स्कोर, नोट्स और सेव, और परीक्षा की तिथि तक की योजना।

ऐप में पढ़ें →