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प्रशासनिक और वित्तीय संबंध, और अंतरराज्यिक निकाय

संघवाद और केंद्र-राज्य संबंध · भाग 2 / 2 · तथ्य-जाँच की तिथि · हम कैसे जाँचते हैं

स्रोतों (नीचे सूचीबद्ध) से AI की मदद से लिखा गया, फिर एक अलग AI से तथ्य-जाँच की गई।

संघ राज्यों को कैसे निदेश देता है और उनके साथ कैसे काम करता है (अनुच्छेद 256–261, 365, अखिल भारतीय सेवाएँ), अंतरराज्यिक जल विवाद और अंतरराज्य परिषद, करों और अनुदानों का बँटवारा, वित्त आयोग, जीएसटी और जीएसटी परिषद, केंद्र-राज्य संबंधों पर आयोग, और व्यापार की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 301–307)।

भाग 1 ने दिखाया कि विधि बनाने की शक्ति संसद और राज्य विधान-मंडलों में कैसे बँटी है। पर विधियों को लागू करना, उनका खर्च उठाना और राज्यों की सीमाओं के पार तालमेल बिठाना भी होता है; यही इस भाग का विषय है: प्रशासनिक संबंध (अनुच्छेद 256 से 261 और अखिल भारतीय सेवाएँ), राज्यों के बीच विवाद और सहयोग सँभालने वाले निकाय, करों और अन्य धन का बँटवारा (भाग 12, जिसमें 2016 में माल और सेवा कर जुड़ा), और पूरे देश में व्यापार की स्वतंत्रता (भाग 13)। राज्यों की अपनी सरकारें और आय है, पर पलड़ा संघ का भारी है: वह बाध्यकारी निदेश दे सकता है, सबसे बड़े कर वसूलता है, और राज्यों को मिलने वाले धन का बड़ा हिस्सा तय करता है।

अनुच्छेद 256 प्रत्येक राज्य से अपेक्षा करता है कि वह अपनी कार्यपालिका शक्ति का प्रयोग इस प्रकार करे कि संसद की विधियों का पालन हो, और संघ को इसके लिए आवश्यक निदेश देने देता है। अनुच्छेद 257 जोड़ता है कि राज्य संघ की कार्यपालिका शक्ति में बाधा नहीं डालेगा, और संघ को राष्ट्रीय या सैनिक महत्व के संचार साधनों के निर्माण और रखरखाव तथा रेलों के संरक्षण पर राज्यों को निदेश देने देता है। कारण व्यावहारिक है: मान लीजिए निर्वाचन पर कोई राष्ट्रीय विधि है; यदि राज्य के अधिकारी उसकी अनदेखी करें तो उसका कोई अर्थ नहीं। इसकी धार अनुच्छेद 365 में है: यदि राज्य संघ के किसी निदेश का पालन नहीं करता, तो राष्ट्रपति यह मान सकता है कि उसकी सरकार संविधान के अनुसार नहीं चलाई जा सकती। इससे राष्ट्रपति शासन का द्वार खुलता है, जिसे भाग 3 समझाता है।

सहयोग प्रत्यायोजन से भी चलता है। अनुच्छेद 258 के अधीन राष्ट्रपति, राज्य की सहमति से, संघ के कृत्य उस राज्य या उसके अधिकारियों को सौंप सकता है, और संसद की विधि राज्य के अधिकारियों को शक्तियाँ दे सकती है। सातवें संशोधन (1956) द्वारा जोड़ा गया अनुच्छेद 258क राज्यपाल को, संघ की सहमति से, राज्य के कृत्य संघ को सौंपने देता है। अनुच्छेद 261 भारत के प्रत्येक भाग से अपेक्षा करता है कि वह संघ और प्रत्येक राज्य के सार्वजनिक कार्यों, अभिलेखों और न्यायिक कार्यवाहियों को पूरा विश्वास और पूरी मान्यता दे, और सिविल न्यायालय की अंतिम डिक्री भारत में कहीं भी निष्पादित हो सकती है। मानवीय कड़ी अखिल भारतीय सेवाएँ (अनुच्छेद 312) हैं: जब राज्य सभा उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों के दो-तिहाई से संकल्प करे कि राष्ट्रीय हित में कोई सेवा आवश्यक है, तो संसद विधि द्वारा उसे सृजित कर सकती है। आईएएस और आईपीएस इसी अनुच्छेद के अधीन सृजित मानी जाती हैं, और भारतीय वन सेवा 1966 में आई। इनके अधिकारी संघ भर्ती करता है, पर वे राज्यों में सेवा करते हैं।

नदियाँ राज्यों की सीमाएँ पार करती हैं, और उनके जल पर झगड़े भी। अनुच्छेद 262 संसद को अंतरराज्यिक नदियों के जल के प्रयोग, वितरण या नियंत्रण संबंधी विवादों के निपटारे के लिए विधि बनाने देता है, और यह भी कि वह उच्चतम न्यायालय और अन्य सभी न्यायालयों को उनकी सुनवाई से वर्जित कर दे। संसद ने अंतरराज्यिक नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 में दोनों किए। जब कोई राज्य अनुरोध करे और संघ का समाधान हो जाए कि बातचीत से मामला नहीं सुलझेगा, तो संघ उस विवाद के लिए अधिकरण गठित करता है; 2002 के संशोधन ने उसके निर्णय को उच्चतम न्यायालय के आदेश जैसा बल दिया। कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल और पुदुचेरी के लिए 1990 में गठित कावेरी जल विवाद अधिकरण सबसे प्रसिद्ध उदाहरण है। सोच यह है कि नदी के बँटवारे के लिए साधारण मुकदमे से अधिक विशेषज्ञता और धैर्य चाहिए।

जिन प्रश्नों पर न्यायालय नहीं, मिलकर सोचना चाहिए, उनके लिए अनुच्छेद 263 राष्ट्रपति को, जब भी लोक हित सधे, अंतरराज्य परिषद स्थापित करने देता है, जो राज्यों के विवादों पर सलाह दे, सामान्य हित के विषयों का अध्ययन करे और नीति के बेहतर समन्वय की सिफ़ारिश करे। अनुच्छेद 1950 से था, पर परिषद 1990 में ही, राष्ट्रपति के आदेश से, सरकारिया आयोग के आग्रह के बाद बनी। प्रधानमंत्री इसकी अध्यक्षता करता है; इसके सदस्यों में सभी राज्यों और विधान-मंडल वाले संघ राज्यक्षेत्रों के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री द्वारा चुने गए संघ के मंत्री होते हैं। इससे अलग, राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 ने पाँच क्षेत्रीय परिषदें बनाईं, प्रत्येक की अध्यक्षता संघ के गृह मंत्री करते हैं, और पूर्वोत्तर परिषद का 1971 का अपना अधिनियम है। ये सब सलाहकारी हैं: सहमति बनाते हैं, पर किसी राज्य को आदेश नहीं दे सकते।

धन वह क्षेत्र है जहाँ संघ की बढ़त सबसे स्पष्ट है। अनुच्छेद 265 कहता है कि विधि के प्राधिकार के बिना कोई कर न लगाया जाएगा, न वसूला जाएगा। सातवीं अनुसूची प्रत्येक स्तर को अपने कर देती है: संघ कृषि से भिन्न आय, कंपनियों और आयात पर कर लगाता है; राज्य कृषि आय, भूमि, मादक लिकर और पेट्रोल व डीज़ल की बिक्री पर; और जिस कर का उल्लेख नहीं, वह अवशिष्ट शक्तियाँ के अधीन संसद का है। चूँकि संघ के कर कहीं अधिक आय देते हैं जबकि पुलिस, स्वास्थ्य, विद्यालय और खेती का अधिकांश खर्च राज्य उठाते हैं, संविधान बँटवारे का उपबंध करता है। अनुच्छेद 268 से 271 संघ-स्तर के करों को इस आधार पर बाँटते हैं कि कौन लगाता, वसूलता और रखता है (तालिका देखें)। 80वें संशोधन (2000) के बाद अनुच्छेद 270 संघ के सभी करों को राज्यों के साथ बँटने वाले विभाज्य पूल में रखता है, सिवाय कुछ गिनाई गई मदों, अनुच्छेद 271 के अधीन संघ के अधिभारों और विशिष्ट प्रयोजनों के उपकरों के। राज्य आपत्ति करते हैं कि बढ़ते उपकर और अधिभार पूल को छोटा करते हैं।

संघ-स्तर के कर: कौन लगाता, कौन वसूलता, कौन रखता है (अनुच्छेद 268–271)
अनुच्छेदउदाहरणकौन लगाता हैकौन वसूलता और रखता है
268संघ सूची में उल्लिखित विनिमय-पत्रों, चेकों और ऐसी ही लिखतों पर स्टांप शुल्कसंघराज्य वसूलते और रखते हैं
269माल के अंतरराज्यिक विक्रय या परेषण पर कर (जीएसटी से बाहर)संघसंघ वसूलता है, पूरा राज्यों को सौंपा जाता है
269कअंतरराज्यिक आपूर्ति पर जीएसटीसंघसंघ वसूलता है, जीएसटी परिषद की सलाह पर संसद के उपबंध के अनुसार संघ और राज्यों में बँटता है
270आय-कर, निगम कर, केंद्रीय जीएसटी और संघ के अन्य कर (विभाज्य पूल)संघसंघ वसूलता है, वित्त आयोग की सिफ़ारिश के अनुसार राज्यों के साथ बँटता है
271संघ के करों पर अधिभार (और पूल से बाहर, विशिष्ट प्रयोजनों के उपकर)संघपूरा संघ रखता है

साझा कर ही एकमात्र अंतरण नहीं हैं। अनुच्छेद 275 के अधीन संसद, वित्त आयोग की सलाह पर, सहायता की आवश्यकता वाले राज्यों को भारत की संचित निधि पर भारित सहायता अनुदान दे सकती है, जिसमें अनुसूचित जनजातियों के कल्याण और अनुसूचित क्षेत्रों के बेहतर प्रशासन के लिए विशेष अनुदान हैं। अनुच्छेद 282 अधिक ढीला है: संघ या राज्य किसी भी लोक प्रयोजन के लिए अनुदान दे सकता है, अपने विधायी क्षेत्र से बाहर भी। अनेक केंद्र प्रायोजित योजनाएँ इसी पर टिकी हैं, इसलिए राज्य कहते हैं कि इससे केंद्र को उनके विषयों में दखल मिलता है। संघ संसद द्वारा तय सीमाओं में भारत की संचित निधि की प्रतिभूति पर उधार लेता है (अनुच्छेद 292)। राज्य केवल भारत के भीतर, अपने विधान-मंडल की तय सीमाओं में उधार ले सकता है, और जब तक उस पर संघ का ऋण बकाया है, नए ऋण के लिए उसे संघ की सहमति चाहिए (अनुच्छेद 293)।

पूल का बँटवारा कौन तय करता है? अनुच्छेद 280 के अधीन राष्ट्रपति हर पाँच वर्ष पर, या पहले, एक वित्त आयोग गठित करता है, जिसमें एक अध्यक्ष और चार अन्य सदस्य होते हैं, जिनकी अर्हताएँ वित्त आयोग (प्रकीर्ण उपबंध) अधिनियम, 1951 तय करता है। वह सिफ़ारिश करता है कि साझा करों के शुद्ध आगम संघ और राज्यों के बीच (ऊर्ध्वाधर अंतरण) और राज्यों के आपस में (क्षैतिज अंतरण) कैसे बँटें, और अनुच्छेद 275 के अनुदानों के सिद्धांत क्या हों। 73वें और 74वें संशोधनों के बाद वह यह भी सुझाता है कि पंचायतों और नगरपालिकाओं की सहायता के लिए राज्य की संचित निधि कैसे बढ़े। वह सलाहकारी है: अनुच्छेद 281 के अधीन उसकी रिपोर्ट की गई कार्रवाई के ज्ञापन के साथ दोनों सदनों के समक्ष जाती है। एन.के. सिंह की अध्यक्षता वाले पंद्रहवें वित्त आयोग ने 2021–26 के लिए राज्यों का हिस्सा 41 प्रतिशत रखने की सिफ़ारिश की; अरविंद पनगढ़िया की अध्यक्षता वाला सोलहवाँ आयोग 2026–31 के लिए है।

सबसे बड़ा परिवर्तन माल और सेवा कर से आया। 101वें संशोधन (2016) ने माल और सेवाओं पर संघ और राज्यों के अनेक करों, जैसे उत्पाद-शुल्क, सेवा कर और राज्य वैट, के स्थान पर एक ऐसा कर रखा जिसे दोनों स्तर साझा करते हैं। अनुच्छेद 246क संसद और प्रत्येक राज्य विधान-मंडल को एक साथ जीएसटी विधियाँ बनाने देता है, पर अंतरराज्यिक आपूर्ति पर केवल संसद विधि बनाती है, जिसका कर अनुच्छेद 269क के अधीन संघ वसूलता और बाँटता है। अनुच्छेद 279क माल और सेवा कर परिषद बनाता है: अध्यक्ष संघ के वित्त मंत्री, संघ का एक राज्य मंत्री, और प्रत्येक राज्य से एक मंत्री। निर्णय के लिए उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों के भारित मतों का तीन-चौथाई चाहिए; संघ का मत एक-तिहाई और सभी राज्यों का मिलाकर दो-तिहाई गिना जाता है, इसलिए कोई पक्ष अकेले निर्णय नहीं करा सकता। मानव उपभोग के लिए मद्य जीएसटी से बाहर है; पेट्रोल, डीज़ल और अन्य पेट्रोलियम मदें परिषद द्वारा सुझाई गई तिथि से ही जुड़ेंगी। भारत संघ बनाम मोहित मिनरल्स (2022) में उच्चतम न्यायालय ने कहा कि परिषद की सिफ़ारिशें प्रेरक हैं, बाध्यकारी नहीं।

संघ-राज्य संतुलन की अनेक बार समीक्षा हुई है। पहले प्रशासनिक सुधार आयोग (1966) ने अन्य विषयों के साथ केंद्र-राज्य संबंधों की जाँच की। 1969 में तमिलनाडु सरकार ने राजमन्नार समिति नियुक्त की, जिसने राज्यों के लिए कहीं अधिक स्वायत्तता की वकालत की। न्यायमूर्ति आर.एस. सरकारिया के अधीन 1983 में गठित संघ के सरकारिया आयोग ने 1988 में रिपोर्ट दी कि संविधान को दोबारा लिखने की आवश्यकता नहीं, पर मज़बूत केंद्र को परामर्श से काम करना चाहिए; उसने स्थायी अंतरराज्य परिषद माँगी और अनुच्छेद 356 को केवल अंतिम उपाय के रूप में प्रयोग करने की सलाह दी। पुंछी आयोग (2007, न्यायमूर्ति एम.एम. पुंछी) ने 2010 में बताया कि तब से संबंध कैसे बदले। सहकारी संघवाद का अर्थ है संघ और राज्यों का मिलकर काम करना, जैसे जीएसटी परिषद और नीति आयोग में, जिसने 2015 में योजना आयोग का स्थान लिया। प्रतिस्पर्धी संघवाद का अर्थ है राज्यों का निवेश आकर्षित करने और बेहतर शासन के लिए होड़ करना।

केंद्र-राज्य संबंधों पर आयोग
निकायकिसने, कब गठित कियाअध्यक्षमुख्य बात
पहला प्रशासनिक सुधार आयोगसंघ, 1966मोरारजी देसाई, बाद में के. हनुमंतैयाकेंद्र-राज्य संबंधों सहित प्रशासन की समीक्षा
राजमन्नार समितितमिलनाडु सरकार, 1969पी.वी. राजमन्नारराज्यों के लिए कहीं अधिक स्वायत्तता की माँग
सरकारिया आयोगसंघ, 1983 (रिपोर्ट 1988)न्यायमूर्ति आर.एस. सरकारियापरामर्श से काम करने वाला मज़बूत केंद्र; स्थायी अंतरराज्य परिषद; अनुच्छेद 356 केवल अंतिम उपाय
पुंछी आयोगसंघ, 2007 (रिपोर्ट 2010)न्यायमूर्ति एम.एम. पुंछीसरकारिया के बाद हुए परिवर्तनों के प्रकाश में संबंधों की समीक्षा

संघ को एक राष्ट्रीय बाज़ार भी चाहिए। अनुच्छेद 301 भाग 13 के शेष उपबंधों के अधीन भारत में सर्वत्र व्यापार, वाणिज्य और समागम को अबाध घोषित करता है। संसद लोक हित में इस पर निर्बंधन लगा सकती है (अनुच्छेद 302), पर न संसद न कोई राज्य सूचियों का प्रयोग राज्यों के बीच अधिमान या विभेद के लिए कर सकता है (अनुच्छेद 303), सिवाय इसके कि संसद माल की कमी से निपटने के लिए ऐसा कर सकती है। राज्य अन्य राज्यों के माल पर कर लगा सकता है यदि वैसे ही स्थानीय माल पर वही कर हो (अनुच्छेद 304(क)), और लोक हित में युक्तियुक्त निर्बंधन लगा सकता है, पर ऐसे विधेयक के लिए राष्ट्रपति की पूर्व मंज़ूरी चाहिए (अनुच्छेद 304(ख))। मान लीजिए कोई राज्य पड़ोसी के चावल पर अपने चावल से अधिक कर लगाए: यही वह विभेद है जिसे अनुच्छेद 304(क) वर्जित करता है। जिंदल स्टेनलेस लिमिटेड बनाम हरियाणा राज्य (2016) में नौ न्यायाधीशों की पीठ ने कहा कि विभेद न करने वाला कर अपने आप में अनुच्छेद 301 का उल्लंघन नहीं करता।

कुल मिलाकर यह भाग असमान शर्तों पर साझेदारी दिखाता है। अधिकांश प्रशासन राज्य चलाते हैं, पर अनुच्छेद 256, 257 और 365 के अधीन उन्हें संघ की विधियों और निदेशों का पालन करना होता है, और अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारी दोनों स्तरों को जोड़ते हैं। अधिकांश राजस्व संघ जुटाता है, पर उसे स्वतंत्र वित्त आयोग के माध्यम से विभाज्य पूल बाँटना होता है और वह अनुदान भी दे सकता है, जबकि जीएसटी परिषद दोनों स्तरों से अप्रत्यक्ष करों पर मिलकर निर्णय कराती है। जल विवाद अधिकरणों को, व्यापक प्रश्न सलाहकारी परिषदों को जाते हैं, और व्यापार संबंधी अनुच्छेद भारत को एक बाज़ार रखते हैं। भाग 3 उन क्षणों की ओर मुड़ता है जब साझेदारी स्थगित होती है और संघ नियंत्रण ले लेता है: आपात उपबंध।

परीक्षा में ध्यान दें

पुनरावृत्ति

अभ्यास प्रश्न

Q1. संविधान के किस अनुच्छेद के अधीन राष्ट्रपति अंतरराज्य परिषद स्थापित कर सकता है?

  1. अनुच्छेद 262
  2. अनुच्छेद 263
  3. अनुच्छेद 280
  4. अनुच्छेद 279क
उत्तर देखें

उत्तर: B. अनुच्छेद 263

अनुच्छेद 263 राष्ट्रपति को राज्यों के विवादों की जाँच, सामान्य हित के विषयों के अध्ययन और बेहतर समन्वय की सिफ़ारिश के लिए परिषद बनाने देता है। अनुच्छेद 262 अंतरराज्यिक नदी जल विवादों से, अनुच्छेद 280 वित्त आयोग से और अनुच्छेद 279क जीएसटी परिषद से संबंधित है।

Q2. जीएसटी परिषद के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इसकी अध्यक्षता संघ के वित्त मंत्री करते हैं।
2. इसके निर्णयों के लिए उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों के भारित मतों का दो-तिहाई बहुमत चाहिए।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 2
  3. 1 और 2 दोनों
  4. न तो 1, न ही 2
उत्तर देखें

उत्तर: A. केवल 1

कथन 1 अनुच्छेद 279क के अधीन सही है। कथन 2 गलत है: परिषद उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों के भारित मतों के तीन-चौथाई से निर्णय करती है, जिसमें संघ के पास एक-तिहाई और सभी राज्यों के पास मिलाकर दो-तिहाई है। इसलिए 'केवल 2', 'दोनों' और 'कोई नहीं' गलत हैं।

Q3. सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए:
सूची I (अनुच्छेद)
A. अनुच्छेद 262
B. अनुच्छेद 280
C. अनुच्छेद 293
D. अनुच्छेद 301
सूची II (विषय)
1. वित्त आयोग
2. राज्यों द्वारा उधार
3. व्यापार, वाणिज्य और समागम की स्वतंत्रता
4. अंतरराज्यिक नदियों के जल पर विवाद
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

  1. A-4, B-1, C-2, D-3
  2. A-1, B-4, C-2, D-3
  3. A-4, B-1, C-3, D-2
  4. A-4, B-2, C-1, D-3
उत्तर देखें

उत्तर: A. A-4, B-1, C-2, D-3

अनुच्छेद 262 जल विवादों, 280 वित्त आयोग, 293 राज्यों द्वारा उधार और 301 व्यापार की स्वतंत्रता से संबंधित है। दूसरा कूट 262 और 280 को बदलता है, तीसरा 293 और 301 को, और चौथा 280 और 293 को।

Q4. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संघ द्वारा विशिष्ट प्रयोजनों के लिए लगाए गए उपकर अनुच्छेद 270 के अधीन राज्यों के साथ बँटने वाले विभाज्य पूल का भाग हैं।
2. अनुच्छेद 271 के अधीन संघ के करों पर अधिभार पूरी तरह संघ को जाते हैं।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 2
  3. 1 और 2 दोनों
  4. न तो 1, न ही 2
उत्तर देखें

उत्तर: B. केवल 2

कथन 1 गलत है: अनुच्छेद 270 विशिष्ट प्रयोजनों के उपकरों को स्पष्ट रूप से साझा पूल से बाहर रखता है। कथन 2 सही है: अनुच्छेद 271 के अधिभार केवल संघ के लिए हैं। इसलिए 'केवल 1', 'दोनों' और 'कोई नहीं' गलत हैं।

Q5. निम्नलिखित में से कौन-सा संविधान के किसी अनुच्छेद के अधीन सीधे नहीं, बल्कि संसद के अधिनियम द्वारा बनाया गया?

  1. वित्त आयोग
  2. अंतरराज्य परिषद
  3. क्षेत्रीय परिषदें
  4. जीएसटी परिषद
उत्तर देखें

उत्तर: C. क्षेत्रीय परिषदें

क्षेत्रीय परिषदें राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 द्वारा बनाई गईं। वित्त आयोग अनुच्छेद 280 से अपेक्षित है, अंतरराज्य परिषद अनुच्छेद 263 के अधीन (1990 के राष्ट्रपति आदेश से) बनी और जीएसटी परिषद अनुच्छेद 279क से बनती है।

Q6. वित्त आयोग के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इसमें राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त एक अध्यक्ष और चार अन्य सदस्य होते हैं।
2. करों के बँटवारे पर इसकी सिफ़ारिशें संघ सरकार के लिए बाध्यकारी हैं।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 2
  3. 1 और 2 दोनों
  4. न तो 1, न ही 2
उत्तर देखें

उत्तर: A. केवल 1

कथन 1 अनुच्छेद 280 के अधीन सही है। कथन 2 गलत है: आयोग सलाहकारी है, और अनुच्छेद 281 केवल यह अपेक्षा करता है कि उसकी सिफ़ारिशें की गई कार्रवाई के ज्ञापन के साथ संसद के समक्ष रखी जाएँ। इसलिए 'केवल 2', 'दोनों' और 'कोई नहीं' गलत हैं।

Q7. अनुच्छेद 304(ख) के अधीन लोक हित में अन्य राज्यों के साथ व्यापार पर युक्तियुक्त निर्बंधन लगाने वाला राज्य का विधेयक राज्य विधान-मंडल में केवल किसके साथ पुरःस्थापित किया जा सकता है?

  1. राष्ट्रपति की पूर्व मंज़ूरी
  2. राज्यपाल की सिफ़ारिश
  3. राज्य सभा का संकल्प
  4. अंतरराज्य परिषद का अनुमोदन
उत्तर देखें

उत्तर: A. राष्ट्रपति की पूर्व मंज़ूरी

अनुच्छेद 304(ख) का परंतुक ऐसे विधेयक के लिए राष्ट्रपति की पूर्व मंज़ूरी अपेक्षित करता है। राज्यपाल की सिफ़ारिश राज्य के धन विधेयकों का नियम है, इस मामले का नहीं; राज्य सभा का संकल्प अनुच्छेद 249 और 312 में चाहिए, 304 में नहीं; और अंतरराज्य परिषद केवल सलाहकारी है।

Q8. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अनुच्छेद 258क के अधीन किसी राज्य का राज्यपाल, संघ सरकार की सहमति से, राज्य के कृत्य संघ को सौंप सकता है।
2. नई अखिल भारतीय सेवा केवल संविधान संशोधन द्वारा सृजित की जा सकती है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 2
  3. 1 और 2 दोनों
  4. न तो 1, न ही 2
उत्तर देखें

उत्तर: A. केवल 1

कथन 1 सही है: सातवें संशोधन (1956) द्वारा जोड़ा गया अनुच्छेद 258क इसकी अनुमति देता है। कथन 2 गलत है: अनुच्छेद 312 के अधीन उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों के दो-तिहाई से समर्थित राज्य सभा का संकल्प और फिर संसद की साधारण विधि पर्याप्त है। इसलिए 'केवल 2', 'दोनों' और 'कोई नहीं' गलत हैं।

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