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माल और सेवा कर
भारत को जीएसटी की आवश्यकता क्यों थी, 101वें संशोधन तक का सफ़र और उसने क्या बदला (अनुच्छेद 246A, 269A, 279A, 366(12A)), सीजीएसटी, एसजीएसटी और आईजीएसटी, इनपुट कर प्रत्यय, जीएसटी ने किन करों की जगह ली और क्या बाहर रहा, जीएसटी परिषद और मोहित मिनरल्स (2022), 2017 से जीएसटी 2.0 (2025) तक दरें, राज्यों को प्रतिकर और उपकर की समाप्ति, और जीएसटी का प्रशासन।
भाग 1 ने दिखाया कि संविधान पहले संघ और राज्यों के करों को अलग-अलग खानों में रखता था। माल और सेवा कर ने माल और सेवाओं पर करों के लिए यह ढाँचा तोड़ दिया। 1 जुलाई 2017 से दोनों स्तरों द्वारा साझा एक ही कर ने पुराने करों की लंबी सूची की जगह ले ली है, संघ के उत्पाद-शुल्क और सेवा कर से लेकर राज्यों के वैट और प्रवेश करों तक। यह भाग बताता है कि बदलाव क्यों ज़रूरी था, 101वें संशोधन ने क्या किया, कर की संरचना कैसी है, जीएसटी परिषद कैसे निर्णय लेती है, जीएसटी से बाहर क्या है, दरें कैसे बदलीं, राज्यों को प्रतिकर कैसे मिला और प्रणाली कैसे चलती है।
जीएसटी से पहले एक वस्तु पर अलग-अलग प्राधिकारी कई बार कर लगाते थे। संघ विनिर्माण पर उत्पाद-शुल्क और सेवाओं पर सेवा कर लगाता था; राज्य राज्य के भीतर बिक्री पर वैट और दूसरे राज्य को बिक्री पर केंद्रीय बिक्री कर लगाते थे, साथ ही प्रवेश कर, चुंगी और अन्य उगाहियाँ। हर प्राधिकारी केवल अपने करों का क्रेडिट देता था, इसलिए राज्य का वैट चुकाने वाला व्यापारी कीमत में पहले से शामिल संघ के उत्पाद-शुल्क को समायोजित नहीं कर सकता था। तब कर ऐसी कीमत पर लगता था जिसमें पहले से कर शामिल था, यही सोपानी प्रभाव है। मान लीजिए कारखाने में कर चुका कपड़ा दर्ज़ी को बिकता है और कमीज़ पर फिर उसकी पूरी कीमत पर कर लगता है: खरीदार पहले के कर पर भी कर चुकाता है। ट्रक राज्यों की सीमा-चौकियों पर कतार में खड़े रहते थे।
सुधार चरणों में आया। अधिकांश राज्य 2005 से पुराने बिक्री करों से वैट पर आए, जिसने पिछले चरणों में चुकाए गए कर का क्रेडिट दिया, पर केवल राज्य करों के भीतर। एफआरबीएम अधिनियम के कार्यान्वयन पर विजय केलकर की अध्यक्षता वाले कार्य बल ने 2004 में एक व्यापक माल और सेवा कर की सिफ़ारिश की। 2011 में लाया गया पहला विधेयक पंद्रहवीं लोक सभा के साथ व्यपगत हो गया। दिसंबर 2014 में पेश संविधान (एक सौ बाईसवाँ संशोधन) विधेयक अगस्त 2016 में संसद से पारित हुआ और आधे से अधिक राज्य विधानमंडलों ने उसका अनुसमर्थन किया, सबसे पहले असम ने। 8 सितंबर 2016 को राष्ट्रपति की अनुमति से यह 101वाँ संशोधन बना, और 1 जुलाई 2017 को जीएसटी शुरू हुआ।
101वें संशोधन ने कराधान की शक्तियों को नए सिरे से जोड़ा। अनुच्छेद 246A संसद और हर राज्य विधानमंडल को एक साथ जीएसटी पर कानून बनाने की शक्ति देता है, पर अंतरराज्यिक व्यापार के दौरान होने वाली आपूर्तियों पर केवल संसद कानून बना सकती है। अनुच्छेद 269A कहता है कि अंतरराज्यिक आपूर्तियों पर जीएसटी संघ लगाता और वसूलता है और परिषद की सिफ़ारिश पर संसद जैसा उपबंध करे, वैसे संघ और राज्यों में बाँटा जाता है। अनुच्छेद 279A माल और सेवा कर परिषद का सृजन करता है। अनुच्छेद 366(12A) माल और सेवा कर को मानवीय उपभोग के लिए मादक लिकर की आपूर्ति पर करों को छोड़कर, माल या सेवाओं या दोनों की आपूर्ति पर किसी कर के रूप में परिभाषित करता है। सेवा कर का आधार अनुच्छेद 268A हटा दिया गया, और कई सूची-प्रविष्टियाँ, जैसे राज्यों का प्रवेश कर, हटाई या सीमित की गईं। संशोधन अधिनियम की धारा 18 ने राज्यों को पाँच वर्ष तक राजस्व हानि के प्रतिकर का वचन दिया।
जीएसटी एक दोहरा कर है। राज्य के भीतर आपूर्ति पर संघ केंद्रीय जीएसटी (सीजीएसटी) और राज्य राज्य जीएसटी (एसजीएसटी) एक ही बिल पर बराबर दरों से लगाते हैं; बिना विधानमंडल वाले संघ राज्यक्षेत्र में एसजीएसटी की जगह यूटीजीएसटी लगता है। एक राज्य से दूसरे राज्य को आपूर्ति पर, और आयात पर, संघ सीजीएसटी और एसजीएसटी के योग के बराबर दर से एकीकृत माल और सेवा कर लगाता है और बाद में राज्यों का हिस्सा निपटाता है। जीएसटी उपभोग पर गंतव्य-आधारित कर है: राजस्व उस राज्य को जाता है जहाँ वस्तु या सेवा का अंतिम उपभोग होता है, न कि जहाँ वह बनी। इसलिए जब तमिलनाडु का कारखाना केरल की दुकान को पंखे बेचता है, तो कारखाना आईजीएसटी लगाता है और राज्य का हिस्सा केरल को जाता है। 2017 के चार केंद्रीय अधिनियम और हर राज्य का एसजीएसटी अधिनियम इस कानून का आधार हैं।
| आपूर्ति | लगने वाला कर | कौन लगाता है |
|---|---|---|
| एक राज्य के भीतर | बराबर दरों पर सीजीएसटी + एसजीएसटी | संघ (सीजीएसटी) और राज्य (एसजीएसटी) |
| बिना विधानमंडल वाले संघ राज्यक्षेत्र के भीतर | सीजीएसटी + यूटीजीएसटी | संघ |
| एक राज्य से दूसरे राज्य को | आईजीएसटी (= सीजीएसटी + एसजीएसटी) | संघ, जो अनु 269A के अधीन इसे बाँटता है |
| आयात | आईजीएसटी, साथ में मूल सीमा शुल्क | संघ |
| निर्यात | शून्य-दर (कोई जीएसटी भार नहीं) | — |
सोपानी प्रभाव को इनपुट कर प्रत्यय समाप्त करता है। व्यवसाय अपनी खरीद पर जीएसटी चुकाता है, अपनी बिक्री पर जीएसटी लेता है, और सरकार को केवल अंतर देता है, इसलिए कर उसके द्वारा जोड़े गए मूल्य पर पड़ता है। मान लीजिए दर 18 प्रतिशत है और एक फ़र्नीचर बनाने वाली ₹100 की लकड़ी खरीदकर ₹18 जीएसटी देती है, फिर ₹150 में मेज़ बेचकर ₹27 लेती है। पहले चुकाए ₹18 का क्रेडिट लेकर वह केवल ₹9 जमा करती है; कुल ₹150 की अंतिम कीमत पर ₹27 वसूले गए, कर पर कर कभी नहीं। क्रेडिट माल और सेवाओं के बीच और राज्यों की सीमाओं के पार चलता है। चूँकि खरीदार क्रेडिट तभी ले सकता है जब विक्रेता बीजक दर्ज करे, जीएसटी फ़र्मों को औपचारिक अर्थव्यवस्था में भी लाता है।
जीएसटी ने अधिकांश अप्रत्यक्ष करों को समाहित कर लिया। संघ की ओर से उसने केंद्रीय उत्पाद-शुल्क (नीचे दी गई वस्तुओं को छोड़कर), सेवा कर, आयात पर अतिरिक्त सीमा शुल्क और कई उपकरों की जगह ली। राज्यों की ओर से उसने वैट, केंद्रीय बिक्री कर, प्रवेश कर और चुंगी, विलासिता कर, क्रय कर और लॉटरी, दाँव और जुए पर करों की जगह ली; मनोरंजन कर केवल वहीं बचा है जहाँ स्थानीय निकाय उसे लगाते हैं। कुछ चीज़ें बाहर रहीं। मानवीय उपभोग के लिए मादक लिकर परिभाषा से ही जीएसटी से बाहर है, इसलिए राज्य उस पर कर लगाते रहते हैं। पाँच पेट्रोलियम उत्पाद, कच्चा तेल, पेट्रोल, डीज़ल, प्राकृतिक गैस और विमानन टरबाइन ईंधन, कानूनन जीएसटी के भीतर हैं पर उन पर कर परिषद द्वारा सुझाई गई तिथि से ही लगेगा; तब तक संघ उत्पाद-शुल्क और राज्य वैट लगाते हैं। बिजली भी जीएसटी से बाहर है। तंबाकू पर जीएसटी लगता है और संघ का उत्पाद-शुल्क भी।
अनुच्छेद 279A परिषद का ढाँचा बताता है। इसका अध्यक्ष संघ का वित्त मंत्री है; अन्य सदस्य राजस्व या वित्त के भारसाधक संघ के राज्य मंत्री और हर राज्य द्वारा नामनिर्दिष्ट वित्त या कराधान का भारसाधक मंत्री या कोई अन्य मंत्री हैं। राज्यों के सदस्य अपने में से एक उपाध्यक्ष चुनते हैं। आधे सदस्य गणपूर्ति बनाते हैं। निर्णय के लिए उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों के भारित मतों का कम से कम तीन-चौथाई चाहिए; संघ के मत का भार डाले गए मतों का एक-तिहाई और सभी राज्यों का मिलाकर दो-तिहाई है। कोई भी पक्ष अकेले निर्णय नहीं करा सकता। परिषद समाहित किए जाने वाले करों, छूटों, दरों, सीमाओं, आदर्श कानूनों और पूर्वोत्तर तथा पहाड़ी राज्यों के लिए विशेष उपबंधों पर सिफ़ारिश करती है। यूनियन ऑफ़ इंडिया बनाम मोहित मिनरल्स (2022) में उच्चतम न्यायालय ने कहा कि इसकी सिफ़ारिशें संसद और राज्य विधानमंडलों के लिए प्रेरक हैं, बाध्यकारी नहीं।
| विशेषता | उपबंध |
|---|---|
| अध्यक्ष | संघ का वित्त मंत्री |
| अन्य सदस्य | संघ का राज्य मंत्री (राजस्व या वित्त); हर राज्य द्वारा नामनिर्दिष्ट एक मंत्री |
| उपाध्यक्ष | राज्यों के सदस्य अपने में से चुनते हैं |
| गणपूर्ति | कुल सदस्यों का आधा |
| निर्णय | उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों के भारित मतों का कम से कम तीन-चौथाई |
| मतों का भार | संघ डाले गए मतों का एक-तिहाई; सभी राज्य मिलाकर दो-तिहाई |
| कानूनी बल | सिफ़ारिशें प्रेरक, बाध्यकारी नहीं (मोहित मिनरल्स, 2022) |
2017 से अधिकांश वस्तुएँ और सेवाएँ 5, 12, 18 और 28 प्रतिशत के चार मुख्य स्लैब में थीं, ताज़ा अनाज और दूध जैसी आवश्यक वस्तुएँ छूट में थीं और सोने तथा कीमती पत्थरों के लिए विशेष कम दरें थीं। कुछ विलासिता और हानिकारक वस्तुओं पर, अधिकतर 28 प्रतिशत स्लैब में, जैसे तंबाकू, वातित पेय और बड़ी कारें, प्रतिकर उपकर भी लगता था। समय के साथ परिषद ने कई वस्तुएँ 28 प्रतिशत से नीचे कीं। सबसे बड़ा बदलाव, जिसे प्रायः जीएसटी 2.0 कहा जाता है, उसकी 56वीं बैठक में 3 सितंबर 2025 को आया: 22 सितंबर 2025 से 12 और 28 प्रतिशत के स्लैब अधिकतर हटा दिए गए, और 5 तथा 18 प्रतिशत की दो मुख्य दरें रहीं, साथ में विलासिता और हानिकारक वस्तुओं की एक छोटी सूची के लिए 40 प्रतिशत की दर। व्यक्तिगत जीवन और स्वास्थ्य बीमा को छूट दी गई।
राज्यों ने अधिकांश माल और सेवाओं पर कर लगाने की शक्ति छोड़ी, इसलिए उन्होंने गारंटी माँगी। माल और सेवा कर (राज्यों को प्रतिकर) अधिनियम, 2017 ने हर राज्य को वचन दिया कि पाँच वर्ष तक, 30 जून 2022 तक, उसका जीएसटी राजस्व 2015-16 के आधार पर प्रति वर्ष 14 प्रतिशत बढ़ेगा, और कोई कमी कोयले सहित विलासिता और हानिकारक वस्तुओं पर लगे जीएसटी प्रतिकर उपकर से पूरी होगी। जब महामारी ने 2020-21 और 2021-22 में वसूली घटाई, तो संघ ने उधार लेकर राज्यों को बैक-टू-बैक ऋण के रूप में पैसा दिया, और उन्हें चुकाने के लिए उपकर 31 मार्च 2026 तक बढ़ाया गया। गारंटी स्वयं जून 2022 में समाप्त हुई। जीएसटी 2.0 ने 22 सितंबर 2025 से अधिकांश वस्तुओं पर उपकर हटाया, और तंबाकू पर यह 1 फ़रवरी 2026 को समाप्त हुआ, जब तंबाकू पर संघ के नए उत्पाद-शुल्क और पान मसाला पर एक उपकर ने उसकी जगह ली।
जीएसटी का संचालन अधिकतर डिजिटल है। माल और सेवा कर नेटवर्क (जीएसटीएन) पंजीकरण, विवरणी और भुगतान का साझा पोर्टल देता है, जिसे संघ और हर राज्य उपयोग करते हैं। आपूर्तिकर्ता को एक सीमा से अधिक कारोबार होने पर पंजीकरण कराना होता है, सामान्यतः माल के लिए ₹40 लाख और सेवाओं के लिए ₹20 लाख, कुछ विशेष श्रेणी राज्यों में कम सीमाओं के साथ। छोटी फ़र्में कंपोज़िशन योजना चुन सकती हैं, जिसमें अधिकांश राज्यों में ₹1.5 करोड़ तक के कारोबार पर कम एकमुश्त दर लगती है, पर वे इनपुट कर प्रत्यय नहीं ले सकतीं और अपने बिलों पर जीएसटी नहीं वसूल सकतीं। अप्रैल 2018 से एक तय मूल्य से अधिक माल ले जाने के लिए ज़रूरी ई-वे बिल अधिकारियों को सीमा-चौकियों के बिना माल पर नज़र रखने देता है। अपीलें सीजीएसटी अधिनियम की धारा 109 के अधीन जीएसटी अपील अधिकरण में जाती हैं। मुनाफ़ाखोरी-रोधी मामले, यानी फ़र्मों द्वारा दर-कटौती खरीदारों तक न पहुँचाना (धारा 171), दिसंबर 2022 में भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग को सौंपे गए।
जीएसटी के लाभ स्पष्ट हैं। हर चरण पर कर और पिछले कर के क्रेडिट ने अधिकांश सोपानी प्रभाव समाप्त किया; सीमा-चौकियाँ हटने से भारत एक राष्ट्रीय बाज़ार के निकट आया; और क्रेडिट की कड़ी ने कई फ़र्मों को औपचारिक अर्थव्यवस्था में खींचा। इसकी लागत मुख्यतः राज्यों पर पड़ी, जिन्होंने अपने अधिकांश अप्रत्यक्ष कर स्वयं तय करने की शक्ति खो दी और केवल लिकर, पेट्रोलियम उत्पाद, बिजली, भूमि और स्टांप शुल्क जैसे कुछ आधार रखे। अनेक दरों ने 2025 तक छोटी फ़र्मों के लिए अनुपालन कठिन बनाया, और जीएसटी से बाहर ईंधन पर अब भी कर पर कर लगता है। परिषद धुरी है: ऐसा मंच जहाँ संघ और राज्य मिलकर निर्णय लेते हैं, सहकारी संघवाद का सबसे स्पष्ट जीवंत उदाहरण।
परीक्षा में ध्यान दें
- जीएसटी परिषद संविधान के अनुच्छेद 279A (101वाँ संशोधन) से बनी है, संसद के किसी साधारण अधिनियम से नहीं।
- मोहित मिनरल्स (2022) में उच्चतम न्यायालय ने कहा कि जीएसटी परिषद की सिफ़ारिशें संसद और राज्य विधानमंडलों के लिए प्रेरक हैं, बाध्यकारी नहीं।
- संघ के मत का भार डाले गए मतों का एक-तिहाई और सभी राज्यों का मिलाकर दो-तिहाई है; तीन-चौथाई बहुमत आवश्यक होने से कोई भी पक्ष अकेले निर्णय नहीं करा सकता।
- मानवीय उपभोग के लिए मादक लिकर संविधान की परिभाषा से ही जीएसटी से बाहर है; पाँच पेट्रोलियम उत्पाद कानूनन जीएसटी के भीतर हैं पर उन पर अभी जीएसटी नहीं लगता।
- अंतरराज्यिक आपूर्ति पर जीएसटी का कानून केवल संसद बनाती है; आईजीएसटी अनुच्छेद 269A के अधीन संघ लगाता और वसूलता है।
- जीएसटी गंतव्य-आधारित है: राजस्व उस राज्य को मिलता है जहाँ वस्तु या सेवा का उपभोग होता है, न कि जहाँ उत्पादन।
- 14% प्रतिकर गारंटी 30 जून 2022 को समाप्त हुई; प्रतिकर उपकर (बैक-टू-बैक ऋण चुकाने के लिए) 2025-26 तक जारी रहा।
- जीएसटी 2.0 (22 सितंबर 2025 से) ने दो मुख्य दरें, 5% और 18%, और चुनिंदा वस्तुओं के लिए 40% रखीं; कंपोज़िशन योजना वाला व्यापारी अब भी इनपुट कर प्रत्यय नहीं ले सकता।
पुनरावृत्ति
- जीएसटी से पहले: संघ का उत्पाद-शुल्क और सेवा कर, राज्यों का वैट, केंद्रीय बिक्री कर, प्रवेश कर और चुंगी, जिनमें क्रेडिट केवल हर स्तर के अपने करों में था, इसलिए कर पर कर लगता था।
- केलकर कार्य बल (2004) ने जीएसटी का प्रस्ताव दिया; 122वाँ संशोधन विधेयक (2014) 101वाँ संशोधन बना (अनुमति 8 सितंबर 2016); जीएसटी 1 जुलाई 2017 से।
- अनु 246A: समवर्ती शक्ति, अंतरराज्यिक आपूर्ति पर केवल संसद; अनु 269A: आईजीएसटी; अनु 279A: जीएसटी परिषद; अनु 366(12A): लिकर को छोड़कर परिभाषा।
- दोहरा जीएसटी: राज्य के भीतर सीजीएसटी + एसजीएसटी (या यूटीजीएसटी), राज्यों के बीच और आयात पर आईजीएसटी; गंतव्य-आधारित; इनपुट कर प्रत्यय से केवल जोड़े गए मूल्य पर कर।
- जीएसटी से बाहर: मानवीय उपभोग के लिए मादक लिकर, बिजली; पाँच पेट्रोलियम उत्पाद परिषद की तिथि की प्रतीक्षा में; तंबाकू पर जीएसटी और उत्पाद-शुल्क दोनों।
- परिषद: संघ का वित्त मंत्री अध्यक्ष, भारित मतों का तीन-चौथाई, संघ एक-तिहाई, राज्य दो-तिहाई; सिफ़ारिशें प्रेरक (मोहित मिनरल्स, 2022)।
- दरें: 2017 से 5, 12, 18, 28%; 22 सितंबर 2025 से जीएसटी 2.0: 5% और 18%, साथ में चुनिंदा वस्तुओं पर 40%।
- प्रतिकर: पाँच वर्ष तक, जून 2022 तक, 2015-16 पर 14% वृद्धि; बैक-टू-बैक ऋणों के लिए उपकर मार्च 2026 तक बढ़ा; तंबाकू पर 1 फ़रवरी 2026 को समाप्त।
- प्रशासन: जीएसटीएन पोर्टल, सीमाएँ (सामान्यतः माल ₹40 लाख, सेवाएँ ₹20 लाख), ₹1.5 करोड़ तक कंपोज़िशन योजना, ई-वे बिल, जीएसटी अपील अधिकरण, दिसंबर 2022 से मुनाफ़ाखोरी-रोधी कार्य सीसीआई के पास।
अभ्यास प्रश्न
Q1. भारत के संविधान का कौन-सा अनुच्छेद माल और सेवा कर परिषद का उपबंध करता है?
- अनुच्छेद 246A
- अनुच्छेद 269A
- अनुच्छेद 279A
- अनुच्छेद 280
उत्तर देखें
उत्तर: C. अनुच्छेद 279A
अनुच्छेद 279A जीएसटी परिषद का सृजन करता है। अनुच्छेद 246A जीएसटी कानून बनाने की समवर्ती शक्ति देता है, अनुच्छेद 269A अंतरराज्यिक आपूर्तियों पर जीएसटी से संबंधित है, और अनुच्छेद 280 वित्त आयोग का उपबंध करता है।
Q2. जीएसटी परिषद के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इसका उपाध्यक्ष राज्यों के सदस्य अपने में से चुनते हैं।
2. संघ के मत का भार डाले गए कुल मतों का आधा होता है।
3. निर्णय के लिए उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों के भारित मतों का कम से कम तीन-चौथाई आवश्यक है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
- केवल 1 और 2
- केवल 1 और 3
- केवल 2 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर देखें
उत्तर: B. केवल 1 और 3
कथन 1 और 3 अनुच्छेद 279A के अनुसार हैं। कथन 2 गलत है: संघ के मत का भार डाले गए मतों का एक-तिहाई है, और सभी राज्यों का मिलाकर दो-तिहाई। इसलिए कथन 2 वाला हर विकल्प गलत है।
Q3. निम्नलिखित में से कौन-सा स्वयं अनुच्छेद 366(12A) की परिभाषा द्वारा माल और सेवा कर से बाहर रखा गया है?
- पेट्रोल
- मानवीय उपभोग के लिए मादक लिकर
- तंबाकू
- प्राकृतिक गैस
उत्तर देखें
उत्तर: B. मानवीय उपभोग के लिए मादक लिकर
जीएसटी की परिभाषा मानवीय उपभोग के लिए मादक लिकर की आपूर्ति पर करों को बाहर रखती है। पेट्रोल और प्राकृतिक गैस कानूनन जीएसटी के भीतर हैं पर उन पर कर परिषद द्वारा सुझाई गई तिथि से ही लगेगा, और तंबाकू पर जीएसटी के साथ संघ का उत्पाद-शुल्क भी लगता है।
Q4. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत में आयात की गई वस्तुओं पर एकीकृत जीएसटी लगता है।
2. जीएसटी में राजस्व उस राज्य को जाता है जहाँ वस्तुओं का उत्पादन होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल 1
- केवल 2
- 1 और 2 दोनों
- न तो 1 और न ही 2
उत्तर देखें
उत्तर: A. केवल 1
कथन 1 सही है: आयात पर मूल सीमा शुल्क के साथ आईजीएसटी लगता है। कथन 2 गलत है: जीएसटी गंतव्य-आधारित है, इसलिए उपभोग करने वाले राज्य को राजस्व मिलता है। अतः 'केवल 2', 'दोनों' और 'कोई नहीं' गलत हैं।
Q5. सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए:
सूची I (अनुच्छेद) — सूची II (विषय)
A. अनुच्छेद 246A — 1. अंतरराज्यिक आपूर्तियों पर जीएसटी, संघ द्वारा लगाया और बाँटा गया
B. अनुच्छेद 269A — 2. माल और सेवा कर की परिभाषा
C. अनुच्छेद 279A — 3. जीएसटी कानून बनाने की संसद और राज्य विधानमंडलों की विशेष शक्ति
D. अनुच्छेद 366(12A) — 4. जीएसटी परिषद
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- A-3, B-1, C-4, D-2
- A-1, B-3, C-4, D-2
- A-3, B-1, C-2, D-4
- A-4, B-1, C-3, D-2
उत्तर देखें
उत्तर: A. A-3, B-1, C-4, D-2
अनुच्छेद 246A जीएसटी कानून बनाने की विशेष शक्ति देता है, 269A अंतरराज्यिक जीएसटी से, 279A परिषद के सृजन से और 366(12A) जीएसटी की परिभाषा से संबंधित है। दूसरा कूट 246A और 269A को उलटता है, तीसरा परिषद और परिभाषा को, और चौथा 246A को परिषद दे देता है।
Q6. यूनियन ऑफ़ इंडिया बनाम मोहित मिनरल्स (2022) में उच्चतम न्यायालय ने कहा कि जीएसटी परिषद की सिफ़ारिशें:
- संसद पर बाध्यकारी हैं पर राज्य विधानमंडलों पर नहीं
- संसद और राज्य विधानमंडलों दोनों पर बाध्यकारी हैं
- संसद और राज्य विधानमंडलों के लिए प्रेरक हैं, बाध्यकारी नहीं
- केवल राष्ट्रपति के अनुमोदन के बाद मान्य हैं
उत्तर देखें
उत्तर: C. संसद और राज्य विधानमंडलों के लिए प्रेरक हैं, बाध्यकारी नहीं
न्यायालय ने सिफ़ारिशों को प्रेरक माना, क्योंकि अनुच्छेद 246A संसद और राज्यों को एक साथ कानून बनाने की शक्ति देता है। वे किसी स्तर पर बाध्यकारी नहीं हैं, इसलिए पहले दो विकल्प गलत हैं, और संविधान उनके लिए राष्ट्रपति का अनुमोदन नहीं माँगता, इसलिए अंतिम विकल्प गलत है।
Q7. जीएसटी के अधीन राज्यों को प्रतिकर के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जीएसटी (राज्यों को प्रतिकर) अधिनियम, 2017 ने आधार वर्ष 2015-16 पर राजस्व में 14 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि मानी।
2. प्रतिकर गारंटी पाँच वर्ष की थी और 30 जून 2022 को समाप्त हुई।
3. प्रतिकर उपकर सभी माल और सेवाओं पर लगाया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर देखें
उत्तर: A. केवल 1 और 2
कथन 1 और 2 सही हैं। कथन 3 गलत है: उपकर केवल कुछ विलासिता और हानिकारक वस्तुओं, जैसे तंबाकू, वातित पेय, बड़ी कारें और कोयला, पर लगता था। इसलिए कथन 3 वाला हर विकल्प गलत है।
Q8. एक व्यापारी ₹200 की वस्तुएँ खरीदती है और उन पर 18 प्रतिशत जीएसटी चुकाती है। वह उन्हें ₹300 में बेचती है और 18 प्रतिशत जीएसटी लेती है। इनपुट कर प्रत्यय का उपयोग करके इस बिक्री पर वह सरकार के पास कितना जीएसटी जमा करती है?
- ₹54
- ₹36
- ₹18
- ₹90
उत्तर देखें
उत्तर: C. ₹18
वह ₹300 का 18% = ₹54 लेती है और खरीद पर चुकाए ₹36 (₹200 का 18%) का क्रेडिट लेती है, इसलिए ₹54 − ₹36 = ₹18 जमा करती है, जो उसके द्वारा जोड़े गए ₹100 के मूल्य पर कर है। ₹54 क्रेडिट को अनदेखा करता है, ₹36 उसकी खरीद पर कर है, और ₹90 घटाने की जगह दोनों को जोड़ देता है।
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ऐप में पढ़ें →स्रोत
- Constitution of India, Articles 246A, 269A, 279A and 366(12A); Constitution (One Hundred and First Amendment) Act, 2016, including section 18 — https://legislative.gov.in/constitution-of-india/
- Central Goods and Services Tax Act, 2017 (including sections 10, 22, 68, 109 and 171); Integrated Goods and Services Tax Act, 2017; Union Territory Goods and Services Tax Act, 2017; Goods and Services Tax (Compensation to States) Act, 2017 — https://www.indiacode.nic.in
- Union of India v. Mohit Minerals Pvt. Ltd., Supreme Court of India, judgment of 19 May 2022 — https://main.sci.gov.in
- Press Information Bureau, Ministry of Finance releases on the 56th GST Council meeting (3 September 2025), the rate changes from 22 September 2025 and the end of the compensation cess — https://pib.gov.in
- Ministry of Finance, Economic Survey 2025-26 (chapter on fiscal developments) — https://www.indiabudget.gov.in/economicsurvey
- Constitution (One Hundred and Twenty-second Amendment) Bill, 2014, as passed by Lok Sabha and Rajya Sabha — https://sansad.in
- Ministry of Finance, Report of the Task Force on Implementation of the Fiscal Responsibility and Budget Management Act, 2003 (chair: Vijay Kelkar, 2004) — https://www.indiabudget.gov.in