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कर और कर प्रणाली: सिद्धांत, प्रत्यक्ष कर, उपकर और अधिभार

कराधान और जीएसटी · भाग 1 / 2 · तथ्य-जाँच की तिथि · हम कैसे जाँचते हैं

स्रोतों (नीचे सूचीबद्ध) से AI की मदद से लिखा गया, फिर एक अलग AI से तथ्य-जाँच की गई।

किसी भुगतान को कर क्या बनाता है, अनुच्छेद 265 और कराधान के सिद्धांत, प्रगतिशील और प्रतिगामी कर, प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर, कौन-सा स्तर कौन-सा कर लगा सकता है, नए आय-कर अधिनियम, 2025 के अधीन आयकर, 2019 की निगम कर कटौती और मैट, समाप्त किए गए कर, जीएसटी से बाहर सीमा शुल्क और उत्पाद-शुल्क, विभाज्य पूल से बाहर उपकर और अधिभार, और कर प्रणाली को परखने की कसौटियाँ।

पिछले अध्यायों ने मान लिया था कि सरकार के पास खर्च करने के लिए पैसा है; यह अध्याय पूछता है कि उसका अधिकांश भाग आता कहाँ से है। कर संघ की राजस्व प्राप्तियाँ में सबसे बड़ा हिस्सा हैं; कोई देश कैसे कर लगाता है, इससे पता चलता है कि वह किससे भुगतान माँगता है और संघ तथा राज्यों के बीच राजस्व कैसे बाँटता है। यह भाग शब्दावली तैयार करता है: किसी भुगतान को कर क्या बनाता है, करों का वर्गीकरण कैसे होता है, कौन-सा स्तर कौन-सा कर लगा सकता है, आय और कंपनियों के लाभ पर कर कैसे लगता है, और उपकर तथा अधिभार क्या हैं। भाग 2 माल और सेवा कर को समर्पित है।

कर सरकार को किया जाने वाला अनिवार्य भुगतान है, जिसके बदले भुगतानकर्ता को कोई विशेष चीज़ नहीं मिलती; इससे सामान्य सार्वजनिक प्रयोजनों का खर्च चलता है। शुल्क (फीस) किसी विशेष सेवा, जैसे पासपोर्ट जारी करने, के लिए लिया जाता है और उसकी लागत से कुछ संबंध रखता है। अनुच्छेद 265 मूल नियम बताता है: "विधि के प्राधिकार से ही कोई कर अधिरोपित या संगृहीत किया जाएगा, अन्यथा नहीं।" केवल कार्यपालिका का आदेश कोई कर नहीं लगा सकता। एडम स्मिथ के चार सिद्धांत आज भी अच्छे कर की सामान्य कसौटी हैं: समता (क्षमता के अनुसार भुगतान), निश्चितता (राशि और तिथि स्पष्ट हों), सुविधा (जब और जैसे करदाता को सुविधा हो, तब वसूली) और मितव्ययिता (वसूली की लागत प्राप्ति की तुलना में कम हो)।

करों को इस आधार पर भी छाँटा जाता है कि आय बढ़ने पर दर कैसे बदलती है। प्रगतिशील कर में दर स्वयं आय के साथ बढ़ती है; भारत के आयकर के स्लैब इसी तरह काम करते हैं। आनुपातिक कर हर आय-स्तर पर एक ही दर लगाता है। प्रतिगामी कर गरीब व्यक्ति की आय का अमीर की तुलना में बड़ा हिस्सा लेता है। नमक पर एकसमान कर इसका पारंपरिक उदाहरण है, क्योंकि गरीब परिवार के खर्च में नमक का हिस्सा कहीं बड़ा होता है। कोई शुल्क मूल्यानुसार (ऐड वैलोरम) होता है जब वह मूल्य के प्रतिशत के रूप में लगे, और विशिष्ट होता है जब प्रति इकाई लगे। अंत में, कर का आघात (इम्पैक्ट) उस पर होता है जो उसे सरकार को चुकाता है, और उसका अंतिम भार (इंसिडेंस) उस पर जो अंततः उसे वहन करता है। जब दोनों अलग हों, तो कर का विवर्तन (शिफ्टिंग) हुआ है।

यही विचार सबसे महत्वपूर्ण वर्गीकरण देता है। प्रत्यक्ष कर वह है जिसका आघात और अंतिम भार एक ही व्यक्ति पर पड़ता है: आयकर कमाने वाला चुकाता है और सामान्यतः उसे आगे नहीं खिसका सकता। अप्रत्यक्ष कर सरकार को एक व्यक्ति चुकाता है पर भार दूसरा उठाता है: दुकानदार जीएसटी चुकाता है और फिर उसे कीमत में ग्राहकों से वसूल लेता है। प्रत्यक्ष करों को भुगतान-क्षमता के अनुसार श्रेणीबद्ध किया जा सकता है, पर बड़ी अनौपचारिक अर्थव्यवस्था में उन्हें वसूलना कठिन और उनसे बचना आसान होता है। अप्रत्यक्ष कर वसूलने में सरल हैं, पर अमीर और गरीब एक ही वस्तु पर एक ही दर चुकाते हैं, इसलिए वे प्रतिगामी होने की प्रवृत्ति रखते हैं। इसलिए कुल कर राजस्व में प्रत्यक्ष करों का बढ़ता हिस्सा प्रायः अधिक न्यायपूर्ण कर प्रणाली का संकेत माना जाता है।

कौन क्या कर लगाएगा, यह संविधान तय करता है। सातवीं अनुसूची में कोई कर केवल वही स्तर लगा सकता है जिसकी सूची में वह है। संघ सूची संसद को कृषि आय से भिन्न आय पर कर, निगम कर, सीमा शुल्क, और जीएसटी से अभी बाहर की वस्तुओं पर उत्पाद-शुल्क देती है: पेट्रोलियम क्रूड, पेट्रोल, डीज़ल, प्राकृतिक गैस, विमानन टरबाइन ईंधन और तंबाकू। राज्य सूची राज्यों को, अन्य करों के साथ, कृषि आय पर और भूमि तथा भवनों पर कर, मानवीय उपभोग के लिए मादक लिकर पर उत्पाद-शुल्क, और पेट्रोलियम उत्पादों तथा लिकर की बिक्री पर कर देती है। जो कर किसी सूची में नहीं है, वह संसद की अवशिष्ट शक्तियाँ के अंतर्गत आता है। अनुच्छेद 276 राज्यों को वृत्तियों, व्यापारों और नियोजनों पर कर लगाने देता है, पर प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष ₹2,500 की सीमा के साथ। जीएसटी इसका प्रमुख अपवाद है: अनुच्छेद 246A के अधीन दोनों स्तर एक ही आपूर्ति पर साथ-साथ कर लगाते हैं (भाग 2)।

व्यक्तिगत आयकर व्यक्तियों, फर्मों और अन्य की आय पर संघ का कर है। छह दशक से अधिक यह आय-कर अधिनियम, 1961 पर चला। संसद ने उसकी जगह आय-कर अधिनियम, 2025 बनाया, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू है; यह कानून को सरल भाषा में फिर से लिखता है और पुराने "पूर्ववर्ष" और "निर्धारण वर्ष" की जोड़ी की जगह एक "कर वर्ष" रखता है। यह कर प्रगतिशील है और स्लैब में लगता है। 2020 से करदाता पुरानी व्यवस्था (अनेक कटौतियों वाली) और नई व्यवस्था (कम दरें, कम कटौतियाँ) में से चुनते रहे हैं; 2023-24 से नई व्यवस्था डिफ़ॉल्ट है। संघ बजट 2025-26 के अनुसार नई व्यवस्था में एक छूट (रिबेट) निवासी व्यक्तियों की ₹12 लाख प्रति वर्ष तक की आय को कर-मुक्त बनाती है। कृषि आय छूट-प्राप्त है। इसका बड़ा भाग स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) के रूप में वसूला जाता है।

संघ कंपनियों के लाभ पर निगम कर लगाता है। सितंबर 2019 में सरकार ने एक अध्यादेश से इसमें भारी कटौती की, जिसे बाद में कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 2019 ने प्रतिस्थापित किया। जो घरेलू कंपनी अधिकांश छूटें छोड़ देती है, वह 22 प्रतिशत, और नई घरेलू विनिर्माण कंपनी 15 प्रतिशत की दर से कर दे सकती है, अधिभार और उपकर से पहले। उद्देश्य था निवेश, विशेषकर विनिर्माण में, आकर्षित करना। चूँकि कुछ कंपनियाँ छूटों का उपयोग करके अपने खातों में बड़ा लाभ पर कर-योग्य आय बहुत कम दिखाती थीं, कानून में न्यूनतम वैकल्पिक कर (मैट) भी है, जो खाता-लाभ (बुक प्रॉफ़िट) पर लगने वाली एक न्यूनतम सीमा है। 22 और 15 प्रतिशत की दरें चुनने वाली कंपनियाँ मैट से बाहर हैं। अर्थशास्त्री अब भी बहस करते हैं कि इसका भार शेयरधारक, कर्मचारी और ग्राहक कितना-कितना उठाते हैं।

कई अन्य प्रत्यक्ष कर आए और गए। संपत्ति कर (वेल्थ टैक्स) को वित्त अधिनियम, 2015 ने समाप्त किया, क्योंकि इससे आय कम और प्रशासन का खर्च अधिक था; उसकी जगह अति-धनी लोगों पर अतिरिक्त अधिभार लगाया गया। लाभांश वितरण कर, जिसे कंपनियाँ घोषित लाभांश पर चुकाती थीं, वित्त अधिनियम, 2020 ने समाप्त किया, इसलिए अब लाभांश पर शेयरधारकों के हाथ में कर लगता है। प्रतिभूति लेनदेन कर (2004) शेयर बाज़ारों में शेयरों के सौदों पर एक छोटा कर है। भूमि या शेयर जैसी परिसंपत्तियाँ बेचने पर होने वाले पूँजीगत लाभ पर आयकर के अंतर्गत कर लगता है। 2016 की समकारी लेवी (इक्वलाइज़ेशन लेवी), जो ऑनलाइन विज्ञापन के लिए विदेशी कंपनियों को किए गए भुगतान पर 6 प्रतिशत थी, के साथ 2020 में ई-कॉमर्स ऑपरेटरों पर 2 प्रतिशत की लेवी जुड़ी; 2 प्रतिशत की लेवी 2024 में और 6 प्रतिशत की लेवी 1 अप्रैल 2025 से समाप्त हुई।

समाप्त या परिवर्तित हुए प्रत्यक्ष कर
करकिस पर लगता थाक्या हुआ
संपत्ति करएक सीमा से ऊपर शुद्ध संपत्तिवित्त अधिनियम, 2015 से समाप्त; इसकी जगह अति-धनी पर अतिरिक्त अधिभार
लाभांश वितरण करकंपनियों द्वारा घोषित लाभांशवित्त अधिनियम, 2020 से समाप्त; लाभांश पर शेयरधारकों के हाथ में कर
समकारी लेवी (2%)विदेशी ई-कॉमर्स ऑपरेटरों की बिक्री (2020 से)2024 में समाप्त
समकारी लेवी (6%)ऑनलाइन विज्ञापन हेतु विदेशी कंपनियों को भुगतान (2016 से)1 अप्रैल 2025 से समाप्त
निगम करकंपनियों का लाभ2019 में कटौती: 22% (बिना छूट), 15% (नई विनिर्माण कंपनी)
आयकर कानूनव्यक्तिगत आय1 अप्रैल 2026 से आय-कर अधिनियम, 2025 ने 1961 के अधिनियम की जगह ली

संघ के दो अप्रत्यक्ष कर जीएसटी से बाहर हैं। पहला, सीमा शुल्क, सीमाशुल्क अधिनियम, 1962 के अधीन भारत में आने वाली वस्तुओं पर, और कभी-कभी निर्यात पर, लगता है। किसी आयात पर प्रायः मूल सीमा शुल्क और आईजीएसटी दोनों लगते हैं; आईजीएसटी उतना ही होता है जितना जीएसटी भारत में बनी वैसी ही वस्तु पर लगता, और आयातक उसका क्रेडिट ले सकता है पर मूल शुल्क का नहीं। सीमा शुल्क व्यापार नीति का भी साधन है: ऊँचा शुल्क घरेलू उत्पादकों को संरक्षण देता है। केंद्रीय उत्पाद-शुल्क, जो कभी विनिर्माण पर संघ का सबसे बड़ा कर था, अब मुख्यतः कच्चे तेल, पेट्रोल, डीज़ल, प्राकृतिक गैस, विमानन टरबाइन ईंधन और तंबाकू उत्पादों पर बचा है। राज्य लिकर पर उत्पाद-शुल्क और पेट्रोलियम उत्पादों पर बिक्री कर या वैट लगाते हैं, इसलिए ईंधन की कीमतें राज्यों में अलग-अलग होती हैं।

अधिभार किसी कर की राशि पर निकाला गया अतिरिक्त भार है, जैसे बहुत ऊँची आय वालों के आयकर पर जोड़ा गया एक प्रतिशत। उपकर किसी घोषित प्रयोजन के लिए लगाया गया कर है; सबसे प्रसिद्ध आयकर पर 4 प्रतिशत का स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर है, जो 2018 में पहले के शिक्षा उपकरों की जगह लाया गया। दोनों बँटवारे के कारण महत्वपूर्ण हैं। अनुच्छेद 270 संघ के करों की शुद्ध प्राप्तियों को एक विभाज्य पूल में रखता है, जिसे वित्त आयोग की सलाह पर राज्यों से बाँटा जाता है, पर उपकर और अधिभार इससे बाहर हैं, और अनुच्छेद 271 संसद को केवल संघ के लिए अधिभार लगाने देता है। राज्यों की शिकायत है कि सकल कर राजस्व में उपकरों और अधिभारों का बढ़ता हिस्सा उनके साझा पूल को छोटा करता है, और भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक ने बताया है कि उपकर की राशि हमेशा उन निधियों तक नहीं पहुँचती जिनके लिए वह उगाही गई थी।

मूल कर, अधिभार और उपकर की तुलना
उगाहीआधारकैसे लगता हैराज्यों से साझा?
संघ का मूल कर (जैसे आयकर, निगम कर)संघ सूची की प्रविष्टियाँ; अनु 270आय, लाभ या मूल्य परहाँ, विभाज्य पूल के माध्यम से
अधिभारअनु 271स्वयं कर का एक प्रतिशतनहीं; संघ के पास रहता है
उपकर (जैसे स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर, 4%)प्रयोजन बताने वाला कानून; अनु 270(1) से बाहरकर पर या वस्तुओं के मूल्य परनहीं; संघ के पास रहता है

कर प्रणाली को कई कसौटियों पर परखा जाता है। कर-जीडीपी अनुपात वसूले गए कर की तुलना अर्थव्यवस्था के आकार से करता है। आगे, कर उत्प्लावकता मापती है कि जीडीपी बढ़ने पर कर राजस्व कितनी तेज़ी से बढ़ता है, दरों में बदलाव के प्रभाव सहित; 1 से अधिक मान का अर्थ है कि राजस्व अर्थव्यवस्था से तेज़ बढ़ रहा है। कर लोच वही प्रतिक्रिया नीतिगत बदलावों का प्रभाव हटाकर मापती है। लाफ़र वक्र का कहना है कि एक बिंदु के बाद ऊँची दरें राजस्व घटा सकती हैं। कर व्यय वह राजस्व है जो छूटों और कटौतियों से छोड़ दिया जाता है; बजट में इस परित्यक्त राजस्व का एक विवरण होता है। कर परिहार (अवॉइडेंस) कानून की खामियों का उपयोग करता है; कर अपवंचन (इवेज़न) आय छिपाना है और अपराध है। 1 अप्रैल 2017 से लागू सामान्य परिहार-रोधी नियम (गार) कर विभाग को ऐसी व्यवस्था का लाभ नकारने देता है जो मुख्यतः कर से बचने के लिए बनाई गई हो, और दोहरा कराधान परिहार समझौते एक ही आय पर दो देशों में कर लगने से रोकते हैं।

कुल मिलाकर, कर प्रणाली कुछ विचारों पर टिकी है। अनुच्छेद 265 हर कर को विधि का विषय बनाता है, और सातवीं अनुसूची हर स्तर को बताती है कि वह क्या कर लगा सकता है। प्रत्यक्ष करों को भुगतान-क्षमता से जोड़ा जा सकता है; अप्रत्यक्ष कर वसूलने में आसान हैं पर गरीबों पर अधिक भारी पड़ते हैं, इसलिए दोनों का संतुलन न्याय को प्रभावित करता है। हाल के सुधार एक ही दिशा में हैं: कम छूटें, कंपनियों के लिए कम दरें, सरल आयकर कानून, और उन छोटे करों की समाप्ति जिनकी लागत उनकी आय से अधिक थी। उपकर और अधिभार, जो पूरी तरह संघ के पास रहते हैं, वहाँ खड़े हैं जहाँ कराधान संघवाद से मिलता है। सबसे व्यापक सुधार, माल और सेवा कर, भाग 2 का विषय है।

परीक्षा में ध्यान दें

पुनरावृत्ति

अभ्यास प्रश्न

Q1. भारत के संविधान का कौन-सा अनुच्छेद उपबंध करता है कि विधि के प्राधिकार से ही कोई कर अधिरोपित या संगृहीत किया जाएगा, अन्यथा नहीं?

  1. अनुच्छेद 112
  2. अनुच्छेद 265
  3. अनुच्छेद 270
  4. अनुच्छेद 280
उत्तर देखें

उत्तर: B. अनुच्छेद 265

अनुच्छेद 265 बिना कानून के कर न लगाने का नियम बताता है। अनुच्छेद 112 वार्षिक वित्तीय विवरण से, अनुच्छेद 270 संघ के करों को राज्यों से बाँटने से, और अनुच्छेद 280 वित्त आयोग से संबंधित है; इनमें से कोई यह नियम नहीं बनाता।

Q2. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्रत्यक्ष कर में कर का आघात और अंतिम भार एक ही व्यक्ति पर पड़ते हैं।
2. जनसाधारण के उपभोग की वस्तुओं पर अप्रत्यक्ष कर प्रभाव में सामान्यतः प्रगतिशील होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 2
  3. 1 और 2 दोनों
  4. न तो 1 और न ही 2
उत्तर देखें

उत्तर: A. केवल 1

कथन 1 प्रत्यक्ष कर की परिभाषा है। कथन 2 गलत है: अमीर और गरीब ऐसी वस्तुओं पर एक ही दर चुकाते हैं, जो गरीब परिवार के खर्च का बड़ा भाग होती हैं, इसलिए ये कर सामान्यतः प्रतिगामी होते हैं। अतः 'केवल 2', 'दोनों' और 'कोई नहीं' गलत हैं।

Q3. निम्नलिखित में से कौन-सा अनुच्छेद 270 के अधीन विभाज्य पूल के माध्यम से राज्यों के साथ साझा नहीं किया जाता?

  1. निगम कर
  2. गैर-कृषि आय पर आयकर
  3. आयकर पर अधिभार
  4. केंद्रीय जीएसटी
उत्तर देखें

उत्तर: C. आयकर पर अधिभार

अनुच्छेद 270 अधिभारों और उपकरों को विभाज्य पूल से बाहर रखता है, और अनुच्छेद 271 संसद को केवल संघ के लिए अधिभार लगाने देता है। निगम कर, आयकर और सीजीएसटी संघ के कर हैं जिनकी शुद्ध प्राप्तियाँ राज्यों से बाँटी जाती हैं, इसलिए बाकी तीन विकल्प गलत हैं।

Q4. सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए:
सूची I (कर या नियम) — सूची II (घटना)
A. संपत्ति कर — 1. 2004 में आरंभ
B. लाभांश वितरण कर — 2. 1 अप्रैल 2017 से लागू
C. प्रतिभूति लेनदेन कर — 3. वित्त अधिनियम, 2015 से समाप्त
D. सामान्य परिहार-रोधी नियम — 4. वित्त अधिनियम, 2020 से समाप्त
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

  1. A-3, B-4, C-1, D-2
  2. A-4, B-3, C-1, D-2
  3. A-3, B-4, C-2, D-1
  4. A-1, B-4, C-3, D-2
उत्तर देखें

उत्तर: A. A-3, B-4, C-1, D-2

संपत्ति कर वित्त अधिनियम, 2015 से और लाभांश वितरण कर वित्त अधिनियम, 2020 से समाप्त हुआ; प्रतिभूति लेनदेन कर 2004 में शुरू हुआ और गार 1 अप्रैल 2017 को लागू हुआ। दूसरा कूट संपत्ति कर और लाभांश वितरण कर को उलट देता है, तीसरा एसटीटी और गार को, और चौथा संपत्ति कर को एसटीटी की 2004 की आरंभ तिथि दे देता है।

Q5. 2019 के निगम कर परिवर्तनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अधिकांश छूटें और प्रोत्साहन छोड़ने वाली घरेलू कंपनी अधिभार और उपकर से पहले 22 प्रतिशत की दर से निगम कर दे सकती है।
2. नई कम दरें चुनने वाली कंपनियों को फिर भी खाता-लाभ पर न्यूनतम वैकल्पिक कर देना होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 2
  3. 1 और 2 दोनों
  4. न तो 1 और न ही 2
उत्तर देखें

उत्तर: A. केवल 1

कथन 1 कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 2019 के 22 प्रतिशत विकल्प का वर्णन है। कथन 2 गलत है: 22 या 15 प्रतिशत की दरें चुनने वाली कंपनियाँ मैट से बाहर हैं। अतः 'केवल 2', 'दोनों' और 'कोई नहीं' गलत हैं।

Q6. यदि किसी अर्थव्यवस्था की कर उत्प्लावकता 1 से अधिक है, तो इसका अर्थ है कि:

  1. कर राजस्व जीडीपी से तेज़ बढ़ रहा है
  2. कर राजस्व जीडीपी से धीमे बढ़ रहा है
  3. कर राजस्व कुल सरकारी व्यय से अधिक है
  4. कर-जीडीपी अनुपात 1 प्रतिशत से अधिक है
उत्तर देखें

उत्तर: A. कर राजस्व जीडीपी से तेज़ बढ़ रहा है

उत्प्लावकता कर राजस्व की वृद्धि की तुलना जीडीपी की वृद्धि से करती है; 1 से अधिक मान का अर्थ है कि राजस्व तेज़ बढ़ता है। धीमी वृद्धि का अर्थ 1 से कम मान होगा; उत्प्लावकता राजस्व की व्यय से तुलना के बारे में कुछ नहीं बताती, और यह वृद्धि दरों का अनुपात है, कर-जीडीपी अनुपात नहीं।

Q7. निम्नलिखित में से कौन-सा कर राज्य सूची के अधीन राज्यों द्वारा लगाया जाता है?

  1. कृषि आय पर कर
  2. निगम कर
  3. सीमा शुल्क
  4. कृषि आय से भिन्न आय पर कर
उत्तर देखें

उत्तर: A. कृषि आय पर कर

कृषि आय पर कर राज्य सूची में हैं। निगम कर, सीमा शुल्क और कृषि आय से भिन्न आय पर कर सभी संघ सूची में हैं, इसलिए बाकी विकल्प गलत हैं।

Q8. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अनुच्छेद 276 वृत्तियों, व्यापारों और नियोजनों पर राज्य द्वारा लगाए जा सकने वाले कर को प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष ₹2,500 तक सीमित करता है।
2. आय-कर अधिनियम, 2025 'पूर्ववर्ष' और 'निर्धारण वर्ष' की जगह एक 'कर वर्ष' रखता है।
3. अनुच्छेद 271 के अधीन लगाए गए अधिभार विभाज्य पूल का भाग हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3
उत्तर देखें

उत्तर: A. केवल 1 और 2

कथन 1 और 2 सही हैं। कथन 3 गलत है: अधिभार संघ के पास रहते हैं और अनुच्छेद 270 के विभाज्य पूल से बाहर हैं। इसलिए कथन 3 वाला हर विकल्प गलत है।

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