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योजना आयोग से नीति आयोग तक
योजना आयोग को क्यों बदला गया; नीति आयोग (केंद्रीय मंत्रिमंडल संकल्प, 1 जनवरी 2015), उसकी शासी परिषद, क्षेत्रीय परिषदें और पूर्णकालिक संरचना; निधि पर अधिकार के बिना विचार मंच, उसके दो हब और डीएमईओ; सहकारी संघवाद (केंद्र प्रायोजित योजनाओं पर 2015 का उप-समूह) और प्रतिस्पर्धी संघवाद (एसडीजी इंडिया इंडेक्स और अन्य राज्य सूचकांक); अटल नवाचार मिशन और आकांक्षी ज़िला तथा ब्लॉक कार्यक्रम; 15-7-3 दस्तावेज़ और योजना/गैर-योजना की समाप्ति; और 2015 के बाद पैसा राज्यों तक कैसे पहुँचता है।
भाग 1 ने पंचवर्षीय योजनाओं का अनुसरण तब तक किया जब तक अंतिम योजना मार्च 2017 में समाप्त नहीं हुई। यह भाग बताता है कि उस व्यवस्था की जगह क्या आया। इसमें शामिल है कि योजना आयोग को क्यों समाप्त किया गया, नीति आयोग कैसे स्थापित और संगठित है, वह क्या करता है और क्या नहीं कर सकता, सहयोग और प्रतिस्पर्धा के माध्यम से राज्यों के साथ कैसे काम करता है, वह कौन-से कार्यक्रम चलाता है, योजनाओं की जगह कौन-से दस्तावेज़ आए, और अब बिना योजना के पैसा राज्यों तक कैसे पहुँचता है। योजना आयोग तय करता था कि हर राज्य को कितना योजना-धन मिले; नीति आयोग एक विचार मंच है जो सलाह देता है और उसके पास बाँटने के लिए अपना कोई पैसा नहीं है।
2000 के दशक तक योजना आयोग की व्यापक आलोचना होने लगी थी। उसकी राष्ट्रीय योजनाएँ दिल्ली में बनती थीं और बहुत अलग ज़रूरतों वाले राज्यों पर एक ही मॉडल लागू करती थीं। हर वर्ष मुख्यमंत्रियों को अपनी वार्षिक योजनाएँ स्वीकृति के लिए आयोग के पास लानी पड़ती थीं, इसलिए एक ऐसे निकाय का, जिसका संविधान में उल्लेख नहीं था, इस पर वास्तविक प्रभाव था कि राज्य विकास-धन कैसे खर्च करें। उसके योजना अनुदान राजस्व बाँटने वाले सांविधानिक निकाय वित्त आयोग द्वारा अनुशंसित अंतरणों के साथ-साथ चलते थे, जिससे उत्तरदायित्व धुँधला होता था और केंद्र को एक दूसरा, विवेकाधीन माध्यम मिलता था। 1991 के बाद, जब अधिकांश निवेश निजी था और अधिकांश कीमतें बाज़ार तय करता था, ऊपर से क्षेत्रवार परिव्यय तय करना पुराना लगने लगा। 15 अगस्त 2014 को अपने स्वतंत्रता दिवस भाषण में प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि आयोग की जगह समय की ज़रूरतों के अनुरूप एक नई संस्था आएगी।
नीति आयोग, जिसका पूरा नाम राष्ट्रीय भारत परिवर्तन संस्थान है, 1 जनवरी 2015 को केंद्रीय मंत्रिमंडल के एक संकल्प द्वारा स्थापित किया गया। जिस निकाय की इसने जगह ली, उसी की तरह यह न तो सांविधानिक है और न सांविधिक: संविधान के किसी अनुच्छेद या संसद के किसी अधिनियम ने इसे नहीं बनाया, और इसकी सलाह बाध्यकारी नहीं है। इसकी शासी परिषद की पहली बैठक 8 फ़रवरी 2015 को हुई। पहले उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया थे, और पहली मुख्य कार्यकारी अधिकारी सिंधुश्री खुल्लर थीं। संकल्प ने नए निकाय को सरकार का प्रमुख नीति विचार मंच बताया, जो संघ और राज्यों को दिशा और नीति संबंधी सुझाव देता है। राष्ट्रीय विकास परिषद को औपचारिक रूप से समाप्त नहीं किया गया, पर बारहवीं योजना को स्वीकृति देने के बाद से उसकी बैठक नहीं बुलाई गई है, और व्यवहार में अब नीति आयोग की शासी परिषद ही वह मंच है जहाँ प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री विकास पर मिलते हैं।
संरचना 2015 के संकल्प के अनुसार है। प्रधानमंत्री अध्यक्ष हैं। शासी परिषद सभी राज्यों और विधानमंडल वाले संघ राज्यक्षेत्रों के मुख्यमंत्रियों तथा अन्य संघ राज्यक्षेत्रों के उपराज्यपालों से बनती है। एक से अधिक राज्य या किसी क्षेत्र को प्रभावित करने वाले मुद्दों के लिए निश्चित अवधि के लिए क्षेत्रीय परिषदें बनाई जा सकती हैं। पूर्णकालिक संगठन का नेतृत्व प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्त उपाध्यक्ष करते हैं और इसमें पूर्णकालिक सदस्य होते हैं। अधिकतम दो अंशकालिक सदस्य हो सकते हैं, जो विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संगठनों और ऐसे निकायों से बारी-बारी से लिए जाते हैं, और प्रधानमंत्री द्वारा नामित अधिकतम चार केंद्रीय मंत्री पदेन सदस्य होते हैं। भारत सरकार के सचिव स्तर का एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिसे प्रधानमंत्री निश्चित कार्यकाल के लिए नियुक्त करते हैं, सचिवालय चलाता है, और विशेषज्ञों को विशेष आमंत्रित के रूप में नामित किया जा सकता है।
नीति आयोग का मुख्य काम सोचना और सलाह देना है, पैसा आवंटित करना नहीं। वह दीर्घकालिक रणनीतियाँ बनाता है, मंत्रालयों और राज्यों को नीति पर सलाह देता है और यह अध्ययन करता है कि अन्यत्र क्या सफल रहा है। 2015 के संकल्प ने नीचे से ऊपर नियोजन की बात की: विश्वसनीय योजनाएँ गाँव के स्तर पर बनें और ऊपर की ओर जोड़ी जाएँ, न कि दिल्ली से नीचे भेजी जाएँ। इस काम को संगठित करने के लिए नीति आयोग दो केंद्रों का वर्णन करता है। टीम इंडिया हब राज्यों के साथ उसके संपर्क की अगुवाई करता है, और ज्ञान एवं नवाचार हब विचार मंच के रूप में उसकी क्षमता बनाता है। तीसरा काम यह जाँचना है कि योजनाएँ परिणाम देती हैं या नहीं। इसके लिए 2015 में कार्यक्रम मूल्यांकन संगठन और स्वतंत्र मूल्यांकन कार्यालय को, जो दोनों योजना आयोग के अधीन काम करते थे, मिलाकर नीति आयोग के संबद्ध कार्यालय के रूप में विकास निगरानी और मूल्यांकन कार्यालय (डीएमईओ) बनाया गया।
सहकारी संघवाद का अर्थ है कि संघ और राज्य साझा समस्याओं पर भागीदारों की तरह साथ काम करें, न कि केंद्र निर्देश जारी करे। नीति आयोग को राज्यों के साथ संरचित और निरंतर संपर्क के माध्यम से इसे बढ़ाने का काम दिया गया, और उसकी शासी परिषद मुख्य मंच है। आरंभ में उसने दोनों स्तरों को छूने वाले प्रश्न सुलझाने के लिए मुख्यमंत्रियों के उप-समूह बनाए। इनमें सबसे प्रसिद्ध, 2015 में बना उप-समूह, केंद्र प्रायोजित योजनाओं पर था, जिन्हें संघ राज्यों के साथ मिलकर वित्तपोषित करता है और राज्य लागू करते हैं। उसने इनकी संख्या घटाने और इन्हें तीन समूहों में बाँटने की सिफ़ारिश की: सामाजिक संरक्षण जैसी कोर ऑफ़ द कोर योजनाएँ, कोर योजनाएँ, और वैकल्पिक योजनाएँ जिनमें राज्य चाहें तो शामिल हों। उसने निधि-साझेदारी के ढाँचे भी सुझाए, मोटे तौर पर कोर योजनाओं के लिए केंद्र और राज्यों के बीच 60:40 और पूर्वोत्तर तथा हिमालयी राज्यों के लिए 90:10, जिन्हें संघ ने बाद में अपनाया।
सहयोग के साथ-साथ नीति आयोग प्रतिस्पर्धी संघवाद को बढ़ावा देता है: राज्य परिणाम सुधारने के लिए एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा करते हैं, और सार्वजनिक रैंकिंग दबाव तथा अनुकरण योग्य उदाहरण बनाती है। वह ऐसे सूचकांक प्रकाशित करता है जो राज्यों को मापने योग्य परिणामों पर अंक देते हैं। एसडीजी इंडिया इंडेक्स, जो पहली बार 2018 में जारी हुआ, सतत विकास लक्ष्यों पर हर राज्य की प्रगति को देखता है। अन्य सूचकांक स्वास्थ्य परिणामों, स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता, जल प्रबंधन, निर्यात तैयारी और नवाचार पर राज्यों को क्रम देते हैं। रैंकिंग में गिरने वाले राज्य से उसके अपने मतदाता और मीडिया सवाल पूछते हैं, जबकि ऊपर चढ़ने वाला राज्य दिखा सकता है कि उसने अलग क्या किया। दोनों विचार साथ बैठते हैं: सहयोग साझा लक्ष्य तय करता है और पैसा तथा ज्ञान बाँटता है, और प्रतिस्पर्धा हर राज्य को बेहतर करने के लिए प्रेरित करती है। आलोचक कहते हैं कि सूचकांक के अंक इस पर निर्भर करते हैं कि संकेतक कैसे चुने और भारित किए गए, इसलिए रैंकिंग एक मार्गदर्शक है, अंतिम निर्णय नहीं।
राज्यों को कोई अनुदान न देने के बावजूद नीति आयोग कई कार्यक्रमों का केंद्र है। 2016 में स्थापित अटल नवाचार मिशन नवाचार और उद्यमिता की संस्कृति को बढ़ावा देता है; इसके सबसे प्रसिद्ध अंग अटल टिंकरिंग लैब हैं, जहाँ स्कूली छात्र विचार बनाते और परखते हैं, और स्टार्ट-अप के लिए अटल इनक्यूबेशन केंद्र हैं। जनवरी 2018 में शुरू हुए आकांक्षी ज़िला कार्यक्रम ने देश के सौ से अधिक सबसे कम विकसित ज़िलों को चुना और उन्हें पाँच विषयों में बँटे संकेतकों पर देखता है: स्वास्थ्य और पोषण, शिक्षा, कृषि और जल संसाधन, वित्तीय समावेशन और कौशल विकास, तथा बुनियादी अवसंरचना। इसके दृष्टिकोण का सार है योजनाओं का अभिसरण, सरकारों और अधिकारियों के बीच सहयोग, और नियमित सार्वजनिक रैंकिंग के माध्यम से ज़िलों के बीच प्रतिस्पर्धा। इसी पर आधारित आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम जनवरी 2023 में 500 ब्लॉकों के लिए शुरू किया गया।
मार्च 2017 में बारहवीं योजना समाप्त होने पर नीति आयोग ने पंचवर्षीय योजना की जगह दस्तावेज़ों का एक नया समूह प्रस्तावित किया: देश को कहाँ होना चाहिए इसकी 15-वर्षीय दृष्टि, वहाँ पहुँचने के लिए 7-वर्षीय रणनीति, और सरकार के वित्त से जुड़ा 3-वर्षीय कार्य एजेंडा। तीन वर्षीय कार्य एजेंडा 2017-18 से 2019-20 तक का था, और दिसंबर 2018 में जारी नए भारत @75 के लिए रणनीति ने 2022 में स्वतंत्रता के 75वें वर्ष के लिए लक्ष्य तय किए। योजनाओं के विपरीत ये दस्तावेज़ हर क्षेत्र या राज्य के लिए परिव्यय तय नहीं करते। एक संबंधित बदलाव केंद्रीय बजट 2017-18 में आया, जिसने व्यय के योजना और गैर-योजना में पुराने विभाजन को समाप्त किया। उस विभाजन के कारण मौजूदा परिसंपत्तियों के रखरखाव के ऊपर नई परियोजनाओं को तरजीह मिलती थी। बजट अब भी राजस्व व्यय को पूँजीगत व्यय से अलग रखता है।
तो 2015 के बाद पैसा राज्यों तक कैसे पहुँचता है? मुख्य रूप से दो मार्गों से। पहला सांविधानिक है: अनुच्छेद 280 के अंतर्गत वित्त आयोग की सिफ़ारिश पर राज्यों को अनुच्छेद 270 के अंतर्गत संघ करों के विभाज्य पूल में हिस्सा और अनुच्छेद 275 के अंतर्गत सहायता अनुदान मिलते हैं। चौदहवें वित्त आयोग ने 2015–20 के लिए विभाज्य पूल में राज्यों का हिस्सा बढ़ाकर 42 प्रतिशत किया, जिससे राज्यों को ठीक उसी समय अधिक बिना शर्त पैसा मिला जब योजना आयोग के विवेकाधीन योजना अनुदान समाप्त हुए। दूसरा मार्ग केंद्रीय मंत्रालयों और वित्त मंत्रालय द्वारा चलाई जाने वाली केंद्र प्रायोजित योजनाएँ और अन्य अंतरण हैं, जो अनुच्छेद 282 पर टिके हैं, जिसके अंतर्गत संघ किसी भी लोक प्रयोजन के लिए अनुदान दे सकता है। नीति आयोग दोनों मार्गों से बाहर है। समर्थक कहते हैं कि इससे वह स्वतंत्र रूप से सोच पाता है और राज्यों को भागीदार मान पाता है; आलोचक कहते हैं कि अपनी सलाह के पीछे पैसा न होने से वह दंतहीन है, और केंद्र का प्रभाव केवल योजना भवन से मंत्रालयों में चला गया।
| विशेषता | योजना आयोग | नीति आयोग |
|---|---|---|
| स्थापना | 15 मार्च 1950, भारत सरकार का संकल्प | 1 जनवरी 2015, केंद्रीय मंत्रिमंडल का संकल्प |
| वैधानिक स्थिति | संविधानेतर, गैर-सांविधिक | संविधानेतर, गैर-सांविधिक |
| प्रमुख | प्रधानमंत्री अध्यक्ष; उपाध्यक्ष | प्रधानमंत्री अध्यक्ष; उपाध्यक्ष |
| राज्यों की भूमिका | राष्ट्रीय विकास परिषद के माध्यम से; वार्षिक योजनाएँ आयोग द्वारा स्वीकृत | मुख्यमंत्री शासी परिषद में; क्षेत्रीय परिषदें |
| निधि पर अधिकार | राज्यों और मंत्रालयों की योजना-सहायता तय करता था | कोई नहीं; सलाहकारी विचार मंच |
| दृष्टिकोण | क्षेत्रवार परिव्यय वाली ऊपर से नीचे पंचवर्षीय योजनाएँ | नीचे से ऊपर; दृष्टि, रणनीति और कार्य एजेंडा; सहकारी और प्रतिस्पर्धी संघवाद |
| मूल्यांकन | कार्यक्रम मूल्यांकन संगठन; स्वतंत्र मूल्यांकन कार्यालय | विकास निगरानी और मूल्यांकन कार्यालय (2015) |
छह दशकों से अधिक समय तक बिना सांविधानिक आधार वाले योजना आयोग ने राष्ट्रीय लक्ष्य तय किए, राज्य योजनाओं को स्वीकृति दी और योजना-धन बाँटा। जिस अर्थव्यवस्था के लिए वह योजना बनाता था वह 1991 के बाद बदल गई, और योजनाएँ स्वयं सांकेतिक हो गईं। 2015 में उस तंत्र की जगह नीति आयोग आया, जो प्रधानमंत्री को शीर्ष पर और मुख्यमंत्रियों को अपनी शासी परिषद में रखता है, पर पैसे पर अधिकार छोड़ देता है। उसके साधन हैं सलाह, दीर्घकालिक रणनीति, मूल्यांकन, पिछड़े ज़िलों और ब्लॉकों के लिए कार्यक्रम, और राज्यों में प्रतिस्पर्धा कराने वाली रैंकिंग; उसके मंचों का लक्ष्य सहकारी संघवाद है। राज्यों को पैसा अब मुख्यतः वित्त आयोग और केंद्रीय मंत्रालयों के माध्यम से जाता है। इससे राज्य अधिक मज़बूत भागीदार बनते हैं या केंद्र का प्रभाव केवल कहीं और चला जाता है, यही इस बदलाव पर मुख्य बहस है।
परीक्षा में ध्यान दें
- नीति आयोग 1 जनवरी 2015 को केंद्रीय मंत्रिमंडल के संकल्प से बना; यह न सांविधानिक है न सांविधिक, ठीक योजना आयोग की तरह। स्वतंत्रता दिवस की घोषणा 15 अगस्त 2014 को हुई थी।
- नीति आयोग के पास राज्यों या मंत्रालयों को निधि आवंटित करने का अधिकार नहीं है। जो प्रश्न कहें कि वह "केंद्रीय सहायता तय करता है" या "कर हस्तांतरण की सिफ़ारिश करता है", वे ग़लत हैं; हस्तांतरण वित्त आयोग का काम है।
- नीति आयोग की अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं; उपाध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्त होते हैं। मुख्य कार्यकारी अधिकारी भारत सरकार के सचिव स्तर का होता है।
- शासी परिषद में सभी राज्यों और विधानमंडल वाले संघ राज्यक्षेत्रों के मुख्यमंत्री तथा अन्य संघ राज्यक्षेत्रों के उपराज्यपाल होते हैं, राज्यों के राज्यपाल नहीं।
- "कोर ऑफ़ द कोर", "कोर" और "वैकल्पिक" केंद्र प्रायोजित योजनाओं की श्रेणियाँ हैं (मुख्यमंत्रियों का 2015 का उप-समूह), जीएसटी दर स्लैब या वित्त आयोग के अनुदान नहीं।
- आकांक्षी ज़िला कार्यक्रम: जनवरी 2018; आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम: जनवरी 2023 (500 ब्लॉक); अटल नवाचार मिशन: 2016; डीएमईओ: 2015।
- योजना/गैर-योजना वर्गीकरण केंद्रीय बजट 2017-18 से समाप्त हुआ; राजस्व/पूँजी का अंतर बना हुआ है।
- राष्ट्रीय विकास परिषद को कभी औपचारिक रूप से समाप्त नहीं किया गया; बारहवीं योजना के बाद से उसकी बैठक ही नहीं बुलाई गई, और अब नीति आयोग की शासी परिषद मिलती-जुलती भूमिका निभाती है।
पुनरावृत्ति
- क्यों बदला गया: सब पर एक जैसी योजनाएँ, राज्य योजनाओं की केंद्रीय स्वीकृति, वित्त आयोग से टकराते योजना अनुदान, 1991 के बाद बदली अर्थव्यवस्था; घोषणा 15 अगस्त 2014।
- नीति आयोग: राष्ट्रीय भारत परिवर्तन संस्थान, 1 जनवरी 2015 का केंद्रीय मंत्रिमंडल संकल्प; गैर-सांविधानिक, गैर-सांविधिक, सलाहकारी।
- शासी परिषद की पहली बैठक 8 फ़रवरी 2015; पहले उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया, पहली मुख्य कार्यकारी अधिकारी सिंधुश्री खुल्लर।
- संरचना: प्रधानमंत्री अध्यक्ष; मुख्यमंत्रियों और उपराज्यपालों की शासी परिषद; क्षेत्रीय परिषदें; उपाध्यक्ष, पूर्णकालिक सदस्य, अधिकतम दो अंशकालिक और चार पदेन सदस्य; सचिव स्तर का मुख्य कार्यकारी अधिकारी।
- कार्य: निधि पर अधिकार के बिना विचार मंच; नीचे से ऊपर नियोजन; टीम इंडिया और ज्ञान एवं नवाचार हब; मूल्यांकन के लिए डीएमईओ (2015)।
- सहकारी संघवाद: शासी परिषद और मुख्यमंत्रियों के उप-समूह (केंद्र प्रायोजित योजनाओं पर 2015 का उप-समूह: कोर ऑफ़ द कोर, कोर, वैकल्पिक)। प्रतिस्पर्धी संघवाद: एसडीजी इंडिया इंडेक्स (2018) और अन्य राज्य सूचकांक।
- कार्यक्रम: अटल नवाचार मिशन (2016), आकांक्षी ज़िले (जनवरी 2018), आकांक्षी ब्लॉक (जनवरी 2023, 500 ब्लॉक)।
- योजनाओं की जगह 15-वर्षीय दृष्टि, 7-वर्षीय रणनीति और 3-वर्षीय कार्य एजेंडा; योजना/गैर-योजना बजट 2017-18 में समाप्त; राज्यों को पैसा अब वित्त आयोग (अनुच्छेद 270, 275, 280) और केंद्रीय मंत्रालयों (अनुच्छेद 282) के माध्यम से।
अभ्यास प्रश्न
Q1. नीति आयोग के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इसे 2015 में संसद के एक अधिनियम द्वारा स्थापित किया गया।
2. प्रधानमंत्री इसके अध्यक्ष हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल 1
- केवल 2
- 1 और 2 दोनों
- न तो 1, न ही 2
उत्तर देखें
उत्तर: B. केवल 2
कथन 1 ग़लत है: नीति आयोग 1 जनवरी 2015 को केंद्रीय मंत्रिमंडल के संकल्प से बना और सांविधिक नहीं है। कथन 2 सही है: प्रधानमंत्री इसके अध्यक्ष हैं। इसलिए "केवल 1", "दोनों" और "कोई नहीं" ग़लत हैं।
Q2. निम्नलिखित में से कौन नीति आयोग की शासी परिषद का सदस्य नहीं है?
- किसी राज्य का मुख्यमंत्री
- विधानमंडल वाले संघ राज्यक्षेत्र का मुख्यमंत्री
- बिना विधानमंडल वाले संघ राज्यक्षेत्र का उपराज्यपाल
- किसी राज्य का राज्यपाल
उत्तर देखें
उत्तर: D. किसी राज्य का राज्यपाल
शासी परिषद में सभी राज्यों और विधानमंडल वाले संघ राज्यक्षेत्रों के मुख्यमंत्री तथा अन्य संघ राज्यक्षेत्रों के उपराज्यपाल होते हैं, इसलिए पहले तीन सदस्य हैं। राज्यों के राज्यपाल सदस्य नहीं हैं।
Q3. सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए:
सूची I (पहल) — सूची II (शुरुआत या गठन का वर्ष)
A. अटल नवाचार मिशन — 1. 2015
B. आकांक्षी ज़िला कार्यक्रम — 2. 2016
C. आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम — 3. 2018
D. विकास निगरानी और मूल्यांकन कार्यालय — 4. 2023
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- A-2, B-3, C-4, D-1
- A-1, B-3, C-4, D-2
- A-2, B-4, C-3, D-1
- A-3, B-2, C-4, D-1
उत्तर देखें
उत्तर: A. A-2, B-3, C-4, D-1
अटल नवाचार मिशन 2016 में बना, आकांक्षी ज़िला कार्यक्रम जनवरी 2018 में शुरू हुआ, आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम जनवरी 2023 में, और डीएमईओ 2015 में बना। दूसरा कूट मिशन और डीएमईओ को बदल देता है, तीसरा दोनों आकांक्षी कार्यक्रमों को, और चौथा मिशन और ज़िला कार्यक्रम को।
Q4. "कोर ऑफ़ द कोर", "कोर" और "वैकल्पिक" श्रेणियाँ किससे संबद्ध हैं?
- माल और सेवा कर के अंतर्गत दर स्लैब
- केंद्र प्रायोजित योजनाओं का युक्तिकरण
- वित्त आयोग द्वारा अनुशंसित अनुदान
- बैंकों के प्राथमिकता क्षेत्र ऋण लक्ष्य
उत्तर देखें
उत्तर: B. केंद्र प्रायोजित योजनाओं का युक्तिकरण
नीति आयोग के अंतर्गत 2015 में बने मुख्यमंत्रियों के उप-समूह ने केंद्र प्रायोजित योजनाओं को कोर ऑफ़ द कोर, कोर और वैकल्पिक में बाँटा। जीएसटी स्लैब जीएसटी परिषद तय करती है, वित्त आयोग के अनुदान राजस्व घाटा और अन्य अनुदान हैं, और प्राथमिकता क्षेत्र ऋण रिज़र्व बैंक का नियम है; इनमें से कोई इन श्रेणियों का प्रयोग नहीं करता।
Q5. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. नीति आयोग राज्य योजनाओं के लिए केंद्रीय सहायता का आवंटन तय करता है।
2. संघ के व्यय का योजना और गैर-योजना में वर्गीकरण केंद्रीय बजट 2017-18 से बंद कर दिया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल 1
- केवल 2
- 1 और 2 दोनों
- न तो 1, न ही 2
उत्तर देखें
उत्तर: B. केवल 2
कथन 1 ग़लत है: योजना आयोग के विपरीत नीति आयोग के पास निधि आवंटित करने का अधिकार नहीं है। कथन 2 सही है: केंद्रीय बजट 2017-18 ने योजना/गैर-योजना वर्गीकरण समाप्त किया। इसलिए "केवल 1", "दोनों" और "कोई नहीं" ग़लत हैं।
Q6. निम्नलिखित में से कौन नीति आयोग द्वारा प्रोत्साहित प्रतिस्पर्धी संघवाद का सर्वोत्तम उदाहरण है?
- जीएसटी परिषद में केंद्र और राज्यों का मतदान
- एसडीजी इंडिया इंडेक्स में राज्यों को क्रम देना
- राज्यों में करों के विभाज्य पूल का बँटवारा
- अनुच्छेद 263 के अंतर्गत अंतरराज्य परिषद की बैठकें
उत्तर देखें
उत्तर: B. एसडीजी इंडिया इंडेक्स में राज्यों को क्रम देना
एसडीजी इंडिया इंडेक्स की तरह परिणामों पर राज्यों की सार्वजनिक रैंकिंग उन्हें सुधार के लिए प्रतिस्पर्धा कराती है। जीएसटी परिषद का मतदान और अंतरराज्य परिषद की बैठकें सहयोग के मंच हैं, और विभाज्य पूल का बँटवारा वित्त आयोग का अंतरण है, प्रतिस्पर्धा नहीं।
Q7. 2017 में पंचवर्षीय योजनाएँ समाप्त होने के बाद नीति आयोग ने उनकी जगह दस्तावेज़ों का कौन-सा समूह प्रस्तावित किया?
- 10-वर्षीय योजना, 5-वर्षीय योजना और वार्षिक योजना
- 15-वर्षीय दृष्टि, 7-वर्षीय रणनीति और 3-वर्षीय कार्य एजेंडा
- 20-वर्षीय परिप्रेक्ष्य योजना और अनवरत वार्षिक योजनाएँ
- 25-वर्षीय दृष्टि और 5-वर्षीय कार्य योजना
उत्तर देखें
उत्तर: B. 15-वर्षीय दृष्टि, 7-वर्षीय रणनीति और 3-वर्षीय कार्य एजेंडा
नीति आयोग ने 15-वर्षीय दृष्टि, 7-वर्षीय रणनीति और 3-वर्षीय कार्य एजेंडा प्रस्तावित किया; तीन वर्षीय कार्य एजेंडा 2017-18 से 2019-20 तक का था। अन्य संयोजन अपनाए नहीं गए, और अनवरत योजना 1978–80 की है।
Q8. योजना आयोग और नीति आयोग के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. दोनों भारत सरकार के कार्यकारी संकल्पों द्वारा स्थापित हुए।
2. दोनों के प्रमुख प्रधानमंत्री रहे हैं।
3. दोनों के पास राज्यों को योजना-निधि आवंटित करने का अधिकार था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर देखें
उत्तर: A. केवल 1 और 2
कथन 1 और 2 सही हैं: दोनों निकाय कार्यकारी संकल्पों (1950 और 2015) पर टिके हैं और दोनों के प्रमुख प्रधानमंत्री हैं। कथन 3 ग़लत है: केवल योजना आयोग योजना-सहायता आवंटित करता था; नीति आयोग के पास ऐसा अधिकार नहीं है। 3 वाला हर विकल्प ग़लत है।
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ऐप में पढ़ें →स्रोत
- Cabinet Secretariat resolution constituting NITI Aayog (1 January 2015); NITI Aayog: about us, Three Year Action Agenda 2017-18 to 2019-20, Strategy for New India @75 (2018), SDG India Index, Aspirational Districts and Blocks Programmes, Atal Innovation Mission, Development Monitoring and Evaluation Office — https://www.niti.gov.in
- Press Information Bureau: releases on the setting up of NITI Aayog (January 2015), the first Governing Council meeting (February 2015), the sub-group of Chief Ministers on centrally sponsored schemes (2015), the Aspirational Districts Programme (2018) and the Aspirational Blocks Programme (2023) — https://pib.gov.in
- Constitution of India, Articles 270, 275, 280 and 282 — https://legislative.gov.in/constitution-of-india/
- Union Budget 2017-18, Budget Speech and Budget at a Glance (removal of the plan/non-plan classification) — https://www.indiabudget.gov.in