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त्वरित पुनरावृत्ति: एक पृष्ठ पर भारतीय रिज़र्व बैंक और मौद्रिक नीति

भारतीय रिज़र्व बैंक और मौद्रिक नीति · त्वरित पुनरावृत्ति · तथ्य-जाँच की तिथि · हम कैसे जाँचते हैं

स्रोतों (नीचे सूचीबद्ध) से AI की मदद से लिखा गया, फिर एक अलग AI से तथ्य-जाँच की गई।

भारतीय रिज़र्व बैंक और मौद्रिक नीति के दोनों भाग त्वरित पुनरावृत्ति के लिए संक्षेप में: आरबीआई का इतिहास, बोर्ड और प्रत्येक कार्य के पीछे का कानून, अधिशेष अंतरण, मौद्रिक नीति का उद्देश्य, एलएएफ गलियारा, खुले बाज़ार की क्रियाएँ और एमएसएस, आरक्षित अनुपात, गुणात्मक साधन, संचरण और सीमाएँ, एक तालिका में सार और आठ मिश्रित प्रश्न।

भारतीय रिज़र्व बैंक देश का केंद्रीय बैंक है। हिल्टन यंग आयोग (1926) की सिफ़ारिश पर आरबीआई अधिनियम, 1934 से बना यह बैंक 1 अप्रैल 1935 को शेयरधारकों के बैंक के रूप में शुरू हुआ, 1937 में इसका केंद्रीय कार्यालय कलकत्ता से बंबई गया और 1 जनवरी 1949 को इसका राष्ट्रीयकरण हुआ। धारा 8 के अंतर्गत केंद्रीय बोर्ड इसे चलाता है: गवर्नर, अधिकतम चार उप-गवर्नर, और केंद्र सरकार द्वारा नामित निदेशक, जिनमें चार स्थानीय बोर्डों से और दो सरकारी अधिकारी होते हैं। गवर्नर को केंद्र पाँच वर्ष तक के लिए नियुक्त करता है, और धारा 7 सरकार को गवर्नर से परामर्श के बाद निर्देश देने देती है।

हर कार्य किसी कानून पर टिका है। केवल आरबीआई बैंक नोट जारी करता है (धारा 22), नोट निर्गम को अलग निर्गम विभाग में रखता है, और 1956 से न्यूनतम आरक्षित प्रणाली का पालन करता है: ₹200 करोड़ का सोना और विदेशी मुद्रा, जिसमें कम से कम ₹115 करोड़ सोना; ₹1 का नोट और सिक्के सरकार जारी करती है। सरकारों के बैंकर के रूप में वह अर्थोपाय अग्रिम के माध्यम से उधार देता है, जो तीन महीनों में चुकाने होते हैं; तदर्थ ट्रेज़री बिल 1997 में समाप्त हुए और एफआरबीएम अधिनियम ने 2006-07 से केंद्र की प्रतिभूतियों की प्राथमिक खरीद पर रोक लगाई। वह बैंकों का बैंकर और अंतिम ऋणदाता है, बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 के अंतर्गत बैंकों और धारा 45IA के अंतर्गत एनबीएफसी का विनियमन करता है, फेमा, 1999 के अंतर्गत विदेशी मुद्रा का प्रबंधन करता है, और 2007 के अधिनियम के अंतर्गत भुगतानों का विनियमन करता है; 2008 में बना एनपीसीआई यूपीआई चलाता है।

आरबीआई ने आईडीबीआई और यूटीआई (1964), नाबार्ड (1982) और राष्ट्रीय आवास बैंक (1988) जैसी संस्थाएँ भी खड़ी कीं, और नवंबर 2021 में एकीकृत लोकपाल योजना शुरू की। उसका अधिशेष धारा 47 के अंतर्गत केंद्र को जाता है; बिमल जालान समिति (2019) ने तुलन-पत्र के 5.5 से 6.5 प्रतिशत का आकस्मिक जोखिम बफ़र तय किया, और मई 2025 में यह सीमा 4.5 से 7.5 प्रतिशत तक चौड़ी की गई। उद्देशिका में 2016 के संशोधन के अनुसार मौद्रिक नीति का प्राथमिक उद्देश्य संवृद्धि को ध्यान में रखते हुए मूल्य स्थिरता है; रुख (समायोजनकारी, तटस्थ या समायोजन की वापसी) दिशा का संकेत देता है।

एमपीसी नीतिगत रेपो दर तय करती है, जिस पर आरबीआई चलनिधि समायोजन सुविधा (2000) के अंतर्गत सरकारी प्रतिभूतियों के बदले बैंकों को उधार देता है। एक गलियारा रातभर की कॉल दर, यानी परिचालन लक्ष्य, को उसके निकट रखता है: स्थायी जमा सुविधा की निचली सीमा (8 अप्रैल 2022 से, रेपो से 25 आधार अंक नीचे, संपार्श्विक नहीं, धारा 17(2B)) और सीमांत स्थायी सुविधा की ऊपरी सीमा (2011, रेपो से 25 आधार अंक ऊपर)। बैंक दर (धारा 49) एमएसएफ दर के बराबर है। खुले बाज़ार की क्रियाएँ टिकाऊ चलनिधि जोड़ने या सोखने के लिए सरकारी प्रतिभूतियाँ खरीदती या बेचती हैं; ऑपरेशन ट्विस्ट (2019) और जी-सैप (2021) इनके रूप थे। बाज़ार स्थिरीकरण योजना (2004) पूँजी अंतर्प्रवाहों का निष्प्रभावीकरण करती है, और प्राप्त राशि बिना खर्च किए अलग खाते में रहती है।

सीआरआर और एसएलआर भी साधन हैं; ₹2,000 के नोट वापस लेने के बाद अगस्त 2023 में 10 प्रतिशत का वृद्धिशील सीआरआर लगाया गया। गुणात्मक साधन (मार्जिन अपेक्षाएँ, चयनात्मक ऋण नियंत्रण, नैतिक अनुनय और प्रत्यक्ष कार्रवाई) और विवेकपूर्ण कदम, जैसे नवंबर 2023 में असुरक्षित उपभोक्ता ऋण पर जोखिम भार में वृद्धि, विशेष प्रकार के उधार को लक्ष्य करते हैं। ऋणों तक संचरण तब सुधरा जब ऋण मूल्य निर्धारण बीपीएलआर (2003) से आधार दर (2010), एमसीएलआर (2016) और 1 अक्टूबर 2019 से कम से कम हर तीन महीने में पुनर्निर्धारित होने वाले बाहरी बेंचमार्क तक पहुँचा। मौद्रिक नीति अब भी आपूर्ति झटकों, लंबे अंतरालों, राजकोषीय प्रभुत्व और अनौपचारिक ऋण से जूझती है, इसलिए उसे सरकार के आपूर्ति पक्ष के समर्थन की आवश्यकता होती है।

एक नज़र में भारतीय रिज़र्व बैंक और मौद्रिक नीति
विषयमुख्य तथ्यकानून या वर्ष
आरबीआई की शुरुआत / राष्ट्रीयकरणशेयरधारकों का बैंक, फिर पूर्णतः सरकारी स्वामित्व1 अप्रैल 1935 / 1 जनवरी 1949
नोट निर्गमकेवल आरबीआई, ₹1 के नोट और सिक्कों को छोड़कर; न्यूनतम आरक्षित ₹200 करोड़ (₹115 करोड़ सोना)धारा 22; 1956 का संशोधन
अर्थोपाय अग्रिमसरकारों को अस्थायी अग्रिम, 3 महीनों में चुकाने योग्यधारा 17(5); तदर्थ बिल 1997 में समाप्त
अधिशेष अंतरणलाभ का शेष केंद्र को; बफ़र 5.5–6.5% (2019), सीमा 4.5–7.5% (2025)धारा 47; जालान समिति
मौद्रिक नीति का उद्देश्यसंवृद्धि को ध्यान में रखते हुए मूल्य स्थिरताउद्देशिका, 2016 में संशोधित
एलएएफ गलियाराएसडीएफ निचली सीमा (रेपो − 25 आधार अंक, संपार्श्विक नहीं), एमएसएफ ऊपरी सीमा (रेपो + 25 आधार अंक); बैंक दर = एमएसएफ2022; 2011; धारा 49
बाज़ार स्थिरीकरण योजनाअंतर्प्रवाहों के निष्प्रभावीकरण हेतु अतिरिक्त प्रतिभूतियाँ; राशि खर्च नहीं होती2004 समझौता ज्ञापन
बाहरी बेंचमार्क ऋणनए परिवर्ती खुदरा और एमएसई ऋण; कम से कम हर 3 महीने में पुनर्निर्धारण1 अक्टूबर 2019

परीक्षा में ध्यान दें

पुनरावृत्ति

अभ्यास प्रश्न

Q1. भारत के लिए केंद्रीय बैंक बनाने का प्रस्ताव, जिससे भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 बना, किस निकाय से आया?

  1. हिल्टन यंग आयोग
  2. नरसिंहम समिति
  3. गाडगिल अध्ययन दल
  4. बिमल जालान समिति
उत्तर देखें

उत्तर: A. हिल्टन यंग आयोग

भारतीय मुद्रा और वित्त पर शाही आयोग (1926), जिसे हिल्टन यंग आयोग कहते हैं, ने केंद्रीय बैंक की सिफ़ारिश की। नरसिंहम समिति (1991) बैंकिंग सुधार से, गाडगिल दल ज़िला ऋण योजना से, और जालान समिति (2019) आरबीआई के पूँजी ढाँचे से संबंधित थी।

Q2. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आरबीआई अधिनियम की धारा 47 आरबीआई को अपने लाभ का शेष केंद्र सरकार को देने के लिए बाध्य करती है।
2. आरबीआई का अधिशेष केंद्रीय बजट में कर राजस्व के रूप में दिखाया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 2
  3. 1 और 2 दोनों
  4. न तो 1, न ही 2
उत्तर देखें

उत्तर: A. केवल 1

कथन 1 सही है। कथन 2 गलत है: अधिशेष एक कर-भिन्न राजस्व प्राप्ति है। इसलिए 'केवल 2', 'दोनों' और 'न तो 1, न ही 2' गलत हैं।

Q3. निम्नलिखित में से किस अधिनियम ने विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम, 1973 का स्थान लिया?

  1. भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007
  2. विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999
  3. एफआरबीएम अधिनियम, 2003
  4. बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949
उत्तर देखें

उत्तर: B. विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999

फेमा, 1999 ने फेरा का स्थान लिया और अधिकांश उल्लंघनों को दीवानी बनाया। 2007 का अधिनियम भुगतान प्रणालियों से, एफआरबीएम अधिनियम राजकोषीय अनुशासन से, और बैंककारी विनियमन अधिनियम (जो फेरा से पुराना है) बैंकों से संबंधित है।

Q4. एलएएफ गलियारे के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. स्थायी जमा सुविधा दर गलियारे की निचली सीमा है।
2. स्थायी जमा सुविधा का उपयोग करने के लिए बैंकों को संपार्श्विक के रूप में सरकारी प्रतिभूतियाँ देनी होती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 2
  3. 1 और 2 दोनों
  4. न तो 1, न ही 2
उत्तर देखें

उत्तर: A. केवल 1

कथन 1 सही है: अप्रैल 2022 से रेपो से 25 आधार अंक नीचे एसडीएफ निचली सीमा है। कथन 2 गलत है: एसडीएफ में बैंक धन जमा करते हैं, और कोई संपार्श्विक नहीं दिया जाता। इसलिए 'केवल 2', 'दोनों' और 'न तो 1, न ही 2' गलत हैं।

Q5. जब आरबीआई रुपये की तेज़ी को धीमा करने के लिए डॉलर खरीदता है और फिर विशेष सरकारी प्रतिभूतियाँ जारी करके उससे बनी रुपया चलनिधि को सोखता है, तो इस प्रक्रिया को कहते हैं

  1. घाटे का मुद्रीकरण
  2. निष्प्रभावीकरण (स्टरलाइज़ेशन)
  3. ऑपरेशन ट्विस्ट
  4. नैतिक अनुनय
उत्तर देखें

उत्तर: B. निष्प्रभावीकरण (स्टरलाइज़ेशन)

विदेशी मुद्रा खरीद से बने रुपयों को सोखना, जैसे बाज़ार स्थिरीकरण योजना के माध्यम से, निष्प्रभावीकरण है। मुद्रीकरण इसका उलटा है (केंद्रीय बैंक द्वारा नई मुद्रा से घाटे का वित्तपोषण); ऑपरेशन ट्विस्ट दीर्घ और अल्पकालीन बॉन्डों की अदला-बदली है; नैतिक अनुनय बैंकों को समझाना है।

Q6. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अर्थोपाय अग्रिम किसी सरकार की प्राप्तियों और भुगतानों के बीच अस्थायी अंतर को पूरा करने के लिए हैं।
2. एफआरबीएम अधिनियम, 2003 सामान्यतः आरबीआई को केंद्र की प्रतिभूतियों के प्राथमिक निर्गम में अभिदान करने से रोकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 2
  3. 1 और 2 दोनों
  4. न तो 1, न ही 2
उत्तर देखें

उत्तर: C. 1 और 2 दोनों

दोनों सही हैं: अर्थोपाय अग्रिम छोटे असंतुलन पूरे करते हैं और तीन महीनों में चुकाने होते हैं, और एफआरबीएम अधिनियम की धारा 5 विशेष आधारों को छोड़कर 2006-07 से प्राथमिक अभिदान पर रोक लगाती है। इसलिए 'केवल 1', 'केवल 2' और 'न तो 1, न ही 2' गलत हैं।

Q7. निम्नलिखित में से कौन-सा बैंकों के पास उपलब्ध चलनिधि को घटाएगा?

  1. आरक्षित नकदी निधि अनुपात में कटौती
  2. सरकारी प्रतिभूतियों की खुले बाज़ार में खरीद
  3. परिवर्ती दर रिवर्स रेपो नीलामी
  4. आरबीआई द्वारा डॉलर-रुपया खरीद/बिक्री स्वैप
उत्तर देखें

उत्तर: C. परिवर्ती दर रिवर्स रेपो नीलामी

परिवर्ती दर रिवर्स रेपो में आरबीआई बैंकों से अतिरिक्त नकदी लेता है, इसलिए चलनिधि घटती है। सीआरआर में कटौती, खुले बाज़ार में खरीद और खरीद/बिक्री स्वैप, सभी प्रणाली में रुपये डालते हैं।

Q8. 1 अक्टूबर 2019 को शुरू हुई बाहरी बेंचमार्क प्रणाली के अंतर्गत, शामिल ऋणों पर ब्याज दर को कम से कम कितने समय में एक बार पुनर्निर्धारित करना होता है?

  1. एक महीने
  2. तीन महीने
  3. छह महीने
  4. एक वर्ष
उत्तर देखें

उत्तर: B. तीन महीने

आरबीआई के 2019 के परिपत्र के अनुसार कम से कम तीन महीने में एक बार पुनर्निर्धारण आवश्यक है, ताकि बेंचमार्क, जैसे रेपो दर, में बदलाव जल्दी उधारकर्ताओं तक पहुँचे। एक महीना अनिवार्य नहीं है, और छह महीने या एक वर्ष नियम की अनुमति से धीमे होंगे।

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